चीन मसले पर कांग्रेस को घेरा
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि चीन ने 1962 में हमारी जमीन के एक टुकड़े पर कब्जा कर लिया था और अब विपक्ष 2023 में मोदी सरकार पर आरोप लगा रहा है कि चीन उस जमीन पर ब्रिज बना रहा है, जिस पर चीन ने 1962 में कब्जा कर लिया था। उन्होंने कहा कि सभी कहते हैं कि हमें सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना चाहिए तो कांग्रेस ने ऐसा क्यों नहीं किया? मैंने सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट देखा। मोदी सरकार में बजट पांच गुना बढ़ा है। 2014 तक यह 3-4 हजार करोड़ था और आज यह 14 हजार करोड़ है। हमारी सरकार इसको लेकर गंभीर है।
पाकिस्तान पर भी कही बड़ी बात
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का भविष्य काफी हद तक उसकी कार्रवाई से तय होता है। मेरा मतलब है कि कोई भी अचानक ऐसी एक कठिन स्थिति में नहीं पहुंचता है। अब उन्हें इसके लिए रास्ता खुद खोजना है। आज हमारा संबंध वैसा नहीं है, जहां हम सीधे उस पर प्रासंगिक हो सकते हैं।
दिल्ली में 1984 में बहुत कुछ हुआ, उस पर डॉक्यूमेंट्री क्यों नहीं?
BBC डॉक्यूमेंट्री पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि कई बार भारत में चल रही राजनीति यहां की नहीं, बल्कि बाहर से आई होती है। विचार और एजेंडा बाहर से आए होते हैं। आप डॉक्यूमेंट्री ही बनाना चाहते हैं तो दिल्ली में 1984 में बहुत कुछ हुआ था। हमें उस विषय पर कोई डॉक्यूमेंट्री देखने को क्यों नहीं मिली?
भाजपा को चुनने की वजह भी बताई
ANI से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि ये कैबिनेट या सरकार (BJP) एक टीम कैबिनेट है, इसमें हम अपने निर्णय नहीं ले सकते, बल्कि पूरी टीम लेती है। जब मुझे मंत्री के रूप में चुना गया था, तब मैं सांसद नहीं था और न ही कोई राजनीतिक पार्टी का सदस्य था। मेरे पास विकल्प था कि मैं राजनीतिक पार्टी चुनूं या नहीं। मैंने इस पार्टी को इसलिए चुना, क्योंकि ये पार्टी देश की भावनाओं को अच्छे से समझती है। आप जब कैबिनेट का हिस्सा होते हैं, तो आपको बहुत कुछ जानने को मिलता है।
इंदिरा गांधी को लेकर भी बोले जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मेरे पिता सरकारी अधिकारी थे और वो 1979 में जनता सरकार में सचिव बने थे, लेकिन उन्हें सचिव पद से हटा दिया गया था। 1980 में वे रक्षा उत्पादन सचिव थे। जब इंदिरा गांधी दोबारा चुनी गईं थीं, तब उन्होंने उनको पद से हटा दिया था। वे काफी ईमानदार थे, शायद यही दिक्कत थी।
कैसे बने विदेश मंत्री? यह भी बताया
विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुझे कैबिनेट में शामिल होने के लिए कहा था। 2011 में मैंने उनसे बीजिंग में मुलाकात की थी, उससे पहले मैं उनसे कभी नहीं मिला था। जब वे CM (गुजरात) थे और वे उस समय वहां (चीन) दौरे पर गए थे। सच कहूं तो उन्होंने मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला था।
हमारा वैश्विक स्तर बहुत ऊंचा: जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि आज हमारा वैश्विक स्तर बहुत ऊंचा है। आज हम अपनी सोच, अभियान और विदेश नीति को लागू करने की रणनीति को लेकर पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हैं और ये होना भी चाहिए। आज वैश्विक मामलों पर विश्व जानना चाहता है कि भारत का क्या मानना है? ये वैश्विक मामले जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद का मुकाबला, ब्लैक मनी, सुरक्षा आदि कुछ भी हो सकता है। हम दुनिया को बहुत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर चुके हैं कि हम अंतरराष्ट्रीय शक्ति हैं। हम इस समय दूसरे देशों के लिए अन्य देशों की तुलना में अधिक काम करने के लिए तैयार हैं।
कोरोना और वैक्सीन भी कही बात
विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर ने कहा कि कोविड के दौरान हम कठिन समय से गुजर रहे थे। हमारे कोविड के कवरेज को देखें। क्या दूसरे देशों में लोगों की मृत्यु नहीं हुई? क्या हमने वह कवरेज देखा? क्या आपने अन्य देशों से उस तरह की तस्वीरें देखीं? दूसरे देशों को कोविड वैक्सीन दिए जाने पर विदेश मंत्री ने कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि उस पर बहुत आलोचना हुई थी, लेकिन उस पर कुछ जगहों से शोर बहुत हुआ था। जब आप किसी के लिए कुछ करते हैं तो पूछा जाता है कि क्यों किया जा रहा है और जब नहीं करते तो बोला जाता है कि क्यों नहीं कर रहे हैं।
खाड़ी देशों के साथ हमारे रिश्ते बहुत अच्छे: जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हुए हैं। ऐसा पहले क्यों नहीं हुआ? मुझे लगता है कि जब आपकी मानसिकता वोट बैंक की हो, तो आप विदेश नीति और इसे क्रियान्वित करने के बारे में गंभीर नहीं होते। आपके लिए यह एक नारा है कि वे हमारे साथ हैं। खाड़ी देशों का कहना है कि आज का भारत 10 साल पहले के भारत से कहीं अधिक विश्वसनीय है। आप वहां के लोगों से पूछेंगे तो मैं शर्त लगाता हूं कि सभी लोग कहेंगे कि हम प्रधानमंत्री मोदी को प्राथमिकता देंगे।
'ऑपरेशन दोस्त' का किया जिक्र
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि जब तुर्किये में भूकंप आया, तब प्रधानमंत्री मोदी हमारे विचार जानना चाहते थे। कुछ ही मिनटों में हमें टीम रवाना करने को कहा गया। 48 घंटे से भी कम समय में टीमों को तुर्किये भेजा गया। 'ऑपरेशन दोस्त' चलाया गया। हमारी टीमों ने वहां पूरी शिद्दत के साथ काम किया और कई जानें बचाईं।
अमेरिका, रूस और यूक्रेन पर भी बोले
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हमारे अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं। पिछले दशक में आप देख सकते हैं कि विश्व में काफी बदलाव हुआ है। आप देख सकते हैं कि रूस के साथ हमारे कितने मजबूत संबंध हैं। रूस और यूक्रेन युद्ध से हमारे संबंध में कोई असर नहीं पड़ा। हमारे संबंध चीन को छोड़कर सभी बड़ी ताकतों से अच्छे हैं। चीन के साथ हमारे संबंध इसलिए अच्छे नहीं है क्योंकि उसने कई समझौते तोड़े हैं।