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'अंतहीन युद्ध की जगह शांति जरूरी', जयशंकर ने बताया भारत का कूटनीतिक एजेंडा; कहा- दुनिया में बढ़ा हमारा प्रभाव

Tue, 15 Sep 2026 07:27 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों और भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विनिर्माण के एक बड़े हिस्से का एक ही क्षेत्र में केंद्रित होना, व्यापार शुल्क में अस्थिरता और तकनीकी प्रतिस्पर्धा वैश्विक व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर विनिर्माण का एक तिहाई हिस्सा एक ही भौगोलिक क्षेत्र में केंद्रित होना गंभीर परिणाम पैदा करता है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि जिन देशों को अपनी प्रधानता में कमी आती दिख रही है, वे अब उन नियमों में विश्वास नहीं करते, जिन्हें उन्होंने खुद बनाया था।
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जयशंकर ने कहा कि आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाना और बाजार पर किसी एक क्षेत्र के प्रभुत्व के प्रभाव को कम करना अब प्रमुख प्राथमिकताएं बन गई हैं। उन्होंने कहा कि मांग के स्तर पर शुल्क में अस्थिरता ने पहले से कमजोर हो चुकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

वैश्विक संघर्षों पर क्या बोले एस जयशंकर?
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'तकनीकी प्रतिस्पर्धा से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में बंटने का खतरा है, जबकि तकनीक का प्रसार अप्रत्याशित बदलाव ला सकता है।' उन्होंने कहा कि भारत जब संवाद और कूटनीति की वकालत करता है और इस बात पर जोर देता है कि अंतहीन युद्ध की जगह शांति को लेनी चाहिए, तो इसके पीछे भारत की अपनी सोच है।
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उन्होंने कहा, 'भारतीय कूटनीति के केंद्रीय एजेंडे में हमेशा शांति और विकास रहेंगे। यह केवल कोई आदर्शवादी लक्ष्य नहीं है, बल्कि दुनिया में प्रगति और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक रास्ता है।' 

भारत की जीडीपी को लेकर क्या बोले विदेश मंत्री?
जयशंकर ने कहा कि पिछले करीब एक दशक में भारत का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हुआ है और कई क्षेत्रों में देश की क्षमताएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा, 'आज दुनिया भारत को बहुत अलग नजरिए से देखती है। यह केवल आंकड़ों, आकार या मात्रा का मामला नहीं है। इसका दुनिया में हमारी मौजूदगी, दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों की गहराई और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर हमारी प्रासंगिकता पर सीधा असर पड़ता है।' उन्होंने कहा, 'हम पहले से अधिक महत्वपूर्ण हैं, हमारा प्रभाव बढ़ा है और इसके साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ी है।'
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