वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत निर्वाचन आयोग के फॉर्म-6 स्पष्टीकरण को 'शब्दों का खेल' बताते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रोकने की मांग दोहराते हुए कहा कि मौजूदा प्रक्रिया में कई खामियां है, जिसका मकसद मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित करना है।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के फॉर्म-6 पर नवीनतम स्पष्टीकरण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे 'शब्दों का खेल' बताते हुए कहा कि इससे कुछ भी स्पष्ट नहीं होता। रमेश ने कहा कि इस बयान से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का खराब डिजाइन उजागर होता है।
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मंगलवार को कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि निर्वाचन आयोग नुकसान के भरपाई की भरसक कोशिश में लगा है, लेकिन आयोग का ऐसा हर प्रयास एसआईआर अभ्यास की खामियों को ही उजागर करता है। रमेश ने जोर देकर कहा कि फॉर्म-6 आवेदकों से स्पष्ट रूप से पूछता है कि क्या वे 'पहली बार मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर रहे हैं।'
फॉर्म-6 स्पष्टीकरण क्यों है भ्रामक?
जयराम रमेश के अनुसार, ईसीआई का यह स्पष्टीकरण कि एसआईआर के दौरान दोबारा शामिल होने वाले मतदाताओं को भी पहली बार के आवेदक माना जा सकता है, एक भ्रामक शब्दों का खेल है। इसका उद्देश्य एक त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया को छिपाना है, जो मतदाताओं को गलत घोषणा करने के लिए मजबूर करती है। रमेश ने आरोप लगाया कि मतदाताओं से ऐसी घोषणा पर हस्ताक्षर कराने के बाद, आयोग अब उन्हें कानूनी परिणामों से बचाने की पेशकश कर रहा है।
एसआईआर प्रक्रिया में क्या हैं खामियां?
रमेश ने कहा कि यह दर्शाता है कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया पर खराब तरीके से विचार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर को बहिष्करण के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पहले मतदाताओं को हटाता है, और फिर उन्हें नए मतदाताओं के रूप में दोबारा शामिल होने के लिए आवेदन करने को कहता है। उन्होंने कहा कि कोई भी क्षति नियंत्रण इस मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया को ठीक नहीं कर सकता।
क्या हैं कानूनी और आधिकारिक चिंताएं?
कांग्रेस नेता ने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ईसीआई को पत्र लिखकर तर्क दिया था कि फॉर्म-6 का इस तरह उपयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ के समक्ष चल रहे एक मामले का भी उल्लेख किया। अदालत ने ईसीआई द्वारा दिए गए तर्क पर सवाल उठाया है, खासकर क्योंकि यह अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं को छोड़ देता है। रमेश ने मांग की कि विशेष गहन पुनरीक्षण को तुरंत रोका जाए।