फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेल रेडियो: पानीपत में प्रसारण के तीन माह पूरे, कोरोना काल में अवसाद दूर करने का बना सहारा

Fri, 16 Apr 2021 03:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत

सार

  • रंग ला रही तिनका तिनका फाउंडेशन की पहल
  • नवरात्र के दौरान भजन की मिल रही फरमाइश
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा की पानीपत जेल में 16 जनवरी 2021 को शुरू किए गए पानीपत रेडियो ने बंदियों का मन जीत लिया है। जेल का रेडियो सबके मन का दुलारा बन गया है। नवरात्र के समय में जेल में भजन सुनने के लिए एकाएक काफी मांग होने लगी है। जेल रेडियो को हर रोज कम से कम 30 फरमाइश लिखित में मिल रही हैं। बंदी इस रेडियो को दिनभर सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं। 
विज्ञापन


कैसे शुरू हुआ यह जेल रेडियो
3 मार्च 2019 में शुरू हुई यह जेल हरियाणा की सबसे नई जेल है। इस जेल में करीब 1,000 बंदी हैं। दिसंबर 2020 में ऑडिशन के बाद इस जेल के पांच बंदियों का चयन हुआ था। इनके नाम हैं- कशिश, सुरेश. सुशील, निमातुल्लाह और श्रवण। बाद में दिनेश को भी इस रेडियो से जोड़ा गया। पांच दिनों की ट्रेनिंग के दौरान इन बंदियों को जेल रेडियो के संचालन और उसकी जरूरतों से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई। 

आज यह सभी छ लोग पूरी जेल में रेडियो जॉकी के तौर पर जाने जाते हैं। इन बंदियों के चयन और उनकी ट्रेनिंग का काम जेल सुधारक और तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नन्दा ने किया था।
विज्ञापन


16 जनवरी को राज्य का हरियाणा का पहला जेल रेडियो पानीपत जेल में ही शुरू हुआ था। इसका उद्घाटन हरियाणा के जेल मंत्री श्री रणजीत सिंह, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह और जेल), जेल महानिदेशक के.सेल्वराज (हरियाणा कारागार ) और श्री देवी दयाल, सुपरिटेंडेंट, पानीपत जेल ने किया था।
 
तिनका जेल रेडियो का अनूठा प्रयोग
इस जेल रेडियो के तहत कई ऐसे प्रयोग किए गए हैं जो ओर किसी जेल में नहीं किए गए हैं। तिनका मॉडल ऑफ रिफॉर्म्स के तहत बंदी हर रोज़ लिखित में अपने गानों की फरमाइश देते हैं ताकि जेलों में लिखने का अभ्यास बना रहे। बंदियों की फरमाइश पर तिनका तिनका फाउंडेशन की रिसर्च टीम काम कर रही है, जिसके नतीजे आने वाले समय में साझा किए जाएंगे। 

अब दो घंटे नियमित प्रसारण
एक घंटे के प्रसारण से शुरू हुआ जेल रेडियो अब दो घंटे का विस्तार पा चुका है। बंदी लगातार इस समय को बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। मज़े की बात यह है कि इस जेल के 15 बंदियों ने रेडियो जॉकी बनने की इच्छा ज़ाहिर की है। उनका अब ऑडिशन किया जाएगा जिसके बाद उनमें से कुछ का चयन होगा।
 
जेल अधिकारियों का सहयोग
पानीपत जेल के अधीक्षक देवी दयाल का कहना है कि जेल रेडियो का जादू पूरी जेल में कायम है। जेल में अवसाद की जबरदस्त कमी आई है, हिंसा में कमी आई है और बंदियों में रेडियो को लेकर जबर्दस्त उत्साह है। जब से रेडियो शुरु हुआ है, तब से एक दिन भी उसके प्रसारण को रोका नहीं गया है। इन बंदियों को रेडियो प्रसारण को सुचारू रूप से चलाने में जेल स्टाफ विशाल शर्मा और राजेश कुमार का विशेष योगदान रहा है। 

तिनका लाइब्रेरी का असर
जेल रेडियो के साथ वाले कमरे में फरवरी के महीने में तिनका जेल लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। इसका मकसद जेल में बंदियों के बीच पढ़ने की इच्छा जगाना और रेडियो जॉकी को भरपूर सामग्री प्रदान करना भी था। इस लाइब्रेरी में करीब 1,000 किताबें हैं और बंदी इसका पूरा इस्तेमाल करते हैं। इसकी देख-रेख भी एक बंदी ही कर रहा है। 

तीन महीने होने पर विशेष कार्यक्रम
सभी छह बंदियों ने आज के लिए विशेष कार्यक्रम बनाए। आज यह रेडियो जॉकी बारी-बारी से पूरी जेल से अपने अनुभवों को साझा करते रहे। इस मौके पर बंदियों के लिए वर्तिका नन्दा का बनाया एक खास पॉडकास्ट भी चलाया गया।
 
राज्य की 19 में से तीन जेलों में रेडियो शुरू
हरियाणा जेल रेडियो की संकल्पना तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नन्दा ने की है। राज्य की 19 जेलों में से तीन जेलों में रेडियो लाया जा  चुका है। इनमें जिला जेल करनाल, जिला जेल रोहतक, जिला जेल गुरुग्राम और केंद्रीय कारागार (प्रथम)  हिसार को शामिल किया है। तीसरे चरण में पांच जेलों को चुना गया है जिनमें जिला जेल सिरसा, सोनीपत, जींद, झज्जर और यमुनानगर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें