वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उठने वाली सत्ता विरोध लहर का इंतजार किए बिना ही राहुल गांधी को पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए। चुनावी जंग से पहले पार्टी की तैयारियों को धार देने के लिहाज से राहुल के कमान संभालने की वकालत करते हुए कहा कि अनिश्चितता का माहौल फायदेमंद नहीं होता।
रमेश ने यह भी जोड़ा कि, ‘राहुल गांधी वस्तुत: पार्टी के अध्यक्ष हैं ही, लेकिन अब उन्हें वास्तविक रूप से भी पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए।’ यह सुझाव भी दिया कि बदले भारत के अनुरूप खुद को बदलने का कांग्रेस के लिए यह सबसे उचित समय है। लगातार चुनावी हार के संदर्भ यह भी माना कि कांग्रेस की संचार रणनीति बहुत प्रभावी नहीं है।
समाज के विभिन्न हिस्सों तक आक्रामक पहुंच बनाने की जरूरत पर बल दिया। मोदी सरकार के कांग्रेस-मुक्त भारत के आह्वानों की ओर इशारा करते हुए कहा कि चुनौतियां बहुत हैँ, लेकिन मायूसी के लिए कोई जगह नहीं है। जो लोग कांग्रेस को जीरो समझकर खारिज कर रहे हैं, वह वक्त से पहले ही मर्सिया पढ़ रहे हैं।
रमेश के मुताबिक कांग्रेस फिलहाल जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, वह 1988 जैसी हैं जब सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी। रमेश ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल के पास पार्टी के सांगठनिक पुनर्गठन के लिए ढेरों विचार हैं और मुझे उम्मीद है कि वह बहुत जल्द पार्टी अध्यक्ष की जगह संभाल लेंगे।
वहीं दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कांग्रेस में नए विचार और नेतृत्व बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2014 में संसदीय चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी को फिर से सत्ता में वापसी कराने में राहुल गांधी निपुण हैं। कांग्रेस महासचिव ने रविवार को कहा कि युवाओं को हमेशा कांग्रेस में जगह दी गई है। देश का जनसांख्यिकी व्यवस्था बदल चुकी है। भारत अब पहले से ज्यादा युवा देश है, इसीलिए हमें अब नए विचार और नया नेतृत्व चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का अंतिम फैसला सोनिया गांधी को ही लेना है।