ओडिशा के पुरी में शनिवार को भगवान श्री जगन्नाथ की बाहुड़ा (वापसी) यात्रा संपन्न हो गई। ये रथ यात्रा 13 दिन तक चली। कोरोना वायरस निगेटिव पाए गए सेवकों को ही रथ खींचने की अनुमति दी गई थी।
इससे पहले बुधवार को भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के साथ अपने मौसी के घर से 12वीं शताब्दी के मंदिर लौटे, इस दौरान प्रशासन ने लोगों से घर पर रहने और टीवी पर ही कार्यक्रम देखने की अपील की।
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बहुड़ा यात्रा
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विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा सुप्रीम कोर्ट के आखिरी वक्त में दिए गए फैसले के बाद 23 जून को कई सारी पाबंदियों के साथ आयोजित की गई, पुरी में होने वाली इस यात्रा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीमित संख्या में सेवकों के भाग लेने और सामाजिक दूरी का पालन करने जैसी शर्तें रखी थीं।
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लकड़ी के रथ पर सवार होकर मंदिर वापस लौटे भगवान जगन्नाथ
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तीनों देवता बुधवार को नौ दिन के बाद अपने जन्म स्थान श्री गुंडिचा मंदिर से बाहुड़ा यात्रा करते हुए तीन राजसी लकड़ी के रथों पर सवार होकर श्री जगन्नाथ मंदिर वापस लौटे। हर साल इस ऐतिहासिक उत्सव के दौरान श्री गुंडिचा मंदिर और मुख्य मंदिर के बीच की देश-विदेश के लाखों भक्तों से भरी रहने वाली भव्य सड़क, इस साल कोरोना के खतरे और सरकारी पाबंदियों की वजह से लगभग खाली ही रही।
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रथ यात्रा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर सभी व्यवस्थाएं की गईं
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पुरी के जिला कलेक्टर बलवंत सिंह ने कहा कि रथ यात्रा के संचालन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। सिंह ने कहा, 'ग्रैंड रोड पर भक्तों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। पुरी शहर के सभी प्रवेश बिंदुओं को सील कर दिया गया और भक्तों से अनुरोध किया गया कि वे घर पर रहें और टेलीविजन पर ही बाहुड़ा जात्रा देखें।'
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5500 से अधिक लोगों की कोरोना जांच की गई थी
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जिला कलेक्टर बलवंत सिंह ने कहा कि सेवकों, पुलिसकर्मियों और मंदिर के अधिकारियों सहित 5,500 से अधिक लोगों का कोविड-19 का परीक्षण किया गया और केवल उन्हें ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और बाहुड़ा यात्रा के दौरान रथ खींचने में भाग लेने की अनुमति दी गई जिनका कोरोना टेस्ट निगेटिव आया।
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लोगों की भीड़ को रोकने के लिए किए गए थे कड़े सुरक्षा इंतजाम
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लोगों की भीड़ को रोकने और सुरक्षा इंतजामों के लिए 70 से अधिक प्लाटून (प्रत्येक में लगभग 33 कर्मी शामिल हैं) तैनात किए गए और कई स्थानों पर बैरिकेड भी लगाए गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने कड़ी चौकसी बनाए रखी, उनकी सहायता के लिए 'बड़ा डंडा' पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए।
'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के मंत्रों के बीच हुई वापसी
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देवताओं को श्री गुंडिचा मंदिर से बाहर ले जाने से पहले विशेष अनुष्ठान किए गए थे और 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के मंत्रों के बीच वापसी यात्रा के लिए सजाए गए तीन रंगीन रथों पर रखा गया था। देवताओं को लकड़ी के विशाल रथ पर ले जाने से पहले 'पहंडी' नामक रस्म निभाई गई और इस दौरान घंटी और शंख बजाए गए। भगवान जगन्नाथ को तीनों रथों में सबसे बड़ा 45 फीट ऊँचा 'नंदीघोष', 44 फीट ऊँचे 'तलध्वज' में बलभद्र और 43 फ़ीट ऊँचे 'दरपदान' में सुभद्रा को रखा गया था।