वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश की टीडीपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को रोकने और लोकतंत्र कमजोर करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने विपक्षी कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील की। लेकिन क्या इन आरोपों के बाद जगन एनडीए से दूरी बनाएंगे? नामांकन प्रक्रिया को लेकर उन्होंने क्या दावे किए? पुलिस और चुनाव अधिकारियों पर उन्होंने कौन से सवाल उठाए? आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की टीडीपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के उनके आरोपों ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। जगन ने विपक्षी कार्यकर्ताओं से एकजुट होने और चुनाव में डर के बिना मुकाबला करने की अपील की है। हालांकि, उनके बयान में एनडीए से दूरी बनाने के किसी स्पष्ट फैसले की घोषणा नहीं की गई है।
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मंगलवार को पुलिवेंदुला में वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जगन ने कहा कि चुनाव में सभी उम्मीदवारों को बराबर अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाला गठबंधन जनता का वोट जीतने के बजाय विपक्षी उम्मीदवारों को मैदान में उतरने से रोककर जीत हासिल करना चाहता है। जगन ने नायडू की तुलना महाभारत के शकुनि से करते हुए कहा कि लोकतंत्र में वही जीतना चाहिए जिसे जनता का समर्थन मिले। उन्होंने गठबंधन की ओर से 17 शहरी निकायों में मिली सफलता का जिक्र भी किया। उनके मुताबिक, इनमें टीडीपी को 15 अध्यक्ष पद, जबकि जनसेना और भाजपा को एक-एक पद मिला है।
जगन ने नामांकन प्रक्रिया में क्या गड़बड़ी होने का आरोप लगाया?
जगन ने दावा किया कि पुलिवेंदुला के 40 वार्डों में से केवल 20 में नामांकन स्वीकार किए गए और सात में से सिर्फ चार जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (जेडपीटीसी) में मुकाबला हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन पत्र छीने या फाड़े गए, कुछ आवेदन जांच के दौरान खारिज कर दिए गए और उम्मीदवारों को निर्धारित केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने उम्मीदवारों को नामांकन केंद्र तक पहुंचाने में मदद नहीं की। जगन के मुताबिक, पुलिस और अधिकारियों की मौजूदगी में भी नामांकन पत्र फाड़े गए।
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पुलिस कार्रवाई और महिला उम्मीदवारों को लेकर क्या दावे किए?
जगन ने आरोप लगाया कि पुलिवेंदुला में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और 37 राउंड गोलियां चलाईं, जिसमें दो लोग पैरों में घायल हुए। उन्होंने स्टन शेल और धुएं वाले गोले इस्तेमाल किए जाने का भी दावा किया। उनके मुताबिक, 924 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास के मामले दर्ज किए गए। कडपा जिले में 39 जेडपीटीसी सीटों में से 17 पर मुकाबला नहीं होने देने का आरोप भी लगाया। जगन ने कहा कि छह जगह नामांकन स्वीकार नहीं हुए और 11 जगह आधी रात के बाद जांच के दौरान खारिज कर दिए गए। उन्होंने महिला उम्मीदवारों को रास्तों और जांच चौकियों पर रोकने, उन पर हमले करने और उनके नामांकन पत्र छीनने का आरोप भी लगाया।
क्या जगन ने एनडीए सरकार और चुनाव अधिकारियों पर भी सवाल उठाए?
जगन ने आरोप लगाया कि तीन साल सत्ता में रहने के बावजूद एनडीए सरकार ने अपने 143 चुनावी वादे पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार, चुनाव आयोग, जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के कामकाज में बदलाव नहीं आया। उन्होंने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। सोमवार को जगन ने कडपा नगर निगम के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ चुनावी तैयारियों और कथित हमलों पर चर्चा की थी। उन्होंने कडपा की महापौर उम्मीदवार बी दीप्ति रेड्डी के समर्थन में एकजुट होने की अपील की और कहा कि वे मतदान के दिन पुलिवेंदुला लौटकर अपना वोट डालेंगे। उन्होंने लोगों से भी बिना डर मतदान करने और संविधान के मुताबिक चुनाव कराने की मांग की।