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कोरोना में मांसाहार से डरे लोग, बर्गर-पिज्जा में चिकन-मटन की जगह ले रहा कटहल

Mon, 03 Aug 2020 08:19 AM IST
योगेश साहू अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

  • मांसाहार से कोरोना न फैलने की जानकारी के बाद भी चिकन-मटन से दूरी बना रहे लोग
  • कटहल में खोज रहे इसका विकल्प, पश्चिमी देशों में हो रहा लोकप्रिय  
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Jackfruit
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विस्तार
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हमारे देश में कटहल को ‘शाकाहारी मांसाहार’ कहकर हंसी-मजाक किया ही जाता था, लेकिन अब पश्चिमी देशों में भी यह मांसाहार के विकल्प के रूप में आजमाया जाने लगा है। कोरोना के कारण मांसाहार से दूरी बरत रहे लोग मांसाहार ‘जैसा’ खाने का मजा लेने के लिए अब कटहल का खूब उपयोग कर रहे हैं।

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अमेरिकी-यूरोपीय समाज में बेहद प्रचलित बर्गर और पिज्जा में अब चिकन-मटन की जगह पर कटहल का उपयोग काफी प्रचलित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कटहल की भारी उपलब्धता को देखते हुए अगर सही रणनीति बनाई जाती है तो ये हमारे किसानों के लिए बड़े फायदे का सौदा साबित हो सकता है। 

दरअसल, कई संस्थाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चिकन-मटन या कोई भी मांसाहार खाने से कोरोना नहीं फैलता है। लेकिन इसके बाद भी लोग मांसाहार खाने से दूरी बना रहे हैं। हल्के मोटे, चिकने और तनावयुक्त गूदे की वजह से कटहल के फल में लोग उसी तरह का स्वाद प्राप्त कर रहे हैं। यही कारण है कि अब यहां कटहल काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। 
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क्या है विशेषता
भारत में कटहल (Jackfruit) तीन से छह हजार साल पहले से उगाया जाता है और उत्पादन के मामले में भी यह प्रथम है। हालांकि, धार्मिक महत्व होने के बाद भी इसे भारत में राष्ट्रीय फल होने का सम्मान नहीं मिला। केरल और तमिलनाडु ने इसे राजकीय फल अवश्य घोषित कर रखा है। बांग्लादेश और श्रीलंका में इसे राष्ट्रीय फल होने का गौरव हासिल है जो इसके उत्पादन में भी विशेष स्थान रखते हैं।   

उत्तर भारत के राज्यों में भी अच्छा उत्पादन होने के बाद भी इसका व्यवसाय दक्षिण भारत में ज्यादा विकसित हुआ है जहां से इसे बांग्लादेश सहित अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों को भेजा जाता है। 

इसका फल पांच किलो से लेकर 55 किलोग्राम तक का हो सकता है। एक परिपक्व कटहल का पेड़ एक वर्ष में 200 से 500 तक फल दे सकता है। कटहल का पेड़ रखरखाव के लिए किसी अतिरिक्त श्रम की मांग नहीं करता जबकि यह किसानों को काफी लाभ पहुंचा सकता है। कटहल के फल को कच्चे से लेकर पके फल तक के रूप में लंबे समय तक खाया जा सकता है। यही कारण है कि व्यापारियों के लिए इसे बेचने के लिए मनचाहा समय मिल जाता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह के मुताबिक कटहल को कच्चे से लेकर पके फल तक के कई रूपों में खाया जाता है। इसे सब्जी, आचार और एनर्जी ड्रिंक के रूप में भी खूब इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्र सरकार को इसके प्रसंस्करण की विधियों को प्रचलित कराना चाहिए जिससे यह किसानों के लिए बड़ी आय का अतिरिक्त साधन बन सकता है।

फल है गुणों की खान
कटहल का फल ऊर्जा का बड़ा स्रोत है। इसके सौ ग्राम के गूदे में 23.25 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जिससे भारी मात्रा में कैलोरी प्राप्त होती है। इसके आलावा इसमें 19.08 ग्राम तक शुगर, 1.5 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इसमें वसा या फैट बिलकुल कम मात्रा (1.5 ग्राम) में पाया जाता है।

यह विटामिन बी का बड़ा स्रोत है। इसके आलावा इसमें विटामिन ए, सी और ई भी पाया जाता है। इसके सौ ग्राम गूदे में पोटेशियम 448 मिलीग्राम, 24 मिलीग्राम कैल्शियम, 29 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 21 मिलीग्राम फास्फोरस पाया जाता है।

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