पाक सेना, आईएसआई और लश्कर जैसे आतंकी संगठन पाकिस्तानी जमीन पर ट्रेनिंग कैंप चलाते हैं। भारतीय फौज ने सर्जीकल स्ट्राइक कर वहां के ट्रेनिंग कैंपों को नष्ट किया था। बैट को एलओसी पर तैनात किया जाता है। जब भी इन्हें मौका मिलता है, ये भारतीय जवान पर फायरिंग कर देते हैं। कई बार हमारे जवानों को पकड़ कर मारना और और उनके शव को क्षत-विक्षत करना भी इनकी गतिविधियों में शामिल रहता है।
अगर ये हमारे जवान को घायल करते हैं या उसे मार देते हैं तो उस हिसाब से इन्हें पेमेंट मिलती है। जब कभी ये हमारे जवान की गोली का निशाना बन जाते हैं तो इन्हें पाकिस्तान में शहीद का दर्जा, 12 लाख रुपये और जन्नत का भरोसा दे देते हैं। खास बात है कि बैट के सदस्य अपना टारगेट पूरा करने के लिए कई माह तक एलओसी पर जमे रहते हैं।
जब भी कोई भारतीय जवान अपनी चौकी या दल से इधर-उधर होता है तो वे निशाना लगा देते हैं। कई बार कोई जवान जब पानी लेने या किसी अन्य कारण से गश्ती दल से पीछे रह जाता है तो बैट सदस्य उस पर फायर कर देते हैं। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी संगठन अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए बैट दस्ते तैयार करते हैं।
एनआईए करेगी कश्मीर आने वाली 'फंड' की जांच
पिछले कई वर्षों से एनआईए टीम को लगातार ऐसे सबूत मिल रहे हैं। वहां पर विदेशों से भी हवाला के जरिए पैसा भेजा जाता रहा है। साल 2012 में एनआईए ने जम्मू-कश्मीर स्थित एक बैंक की कथित जांच पड़ताल की थी। इतना ही नहीं, विदेशों से पैसा भेजे जाने वाली संस्थाओं की भी जांच की गई।
एनआईए के एक अधिकारी का कहना है कि अब कुछ ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं जिनमें विदेशों से पैसा कश्मीर पहुंच रहा है। यह किन लोगों के खातों में आता है, इस बात की पड़ताल हो रही है। जांच में हुर्रियत नेताओं और दूसरे अलगाववादी नेताओं की कथित भूमिका की भी जांच होगी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी शुक्रवार को कहा है कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा की दोबारा से पड़ताल होगी।