80 के दशक में जटिल सुरक्षा चुनौतियों के आलोक में आईटीबीपी के जांबाजों ने 1982 के एशियाई खेलों की सुरक्षा के लिए कमांडो प्रदान किए थे। उसके बाद 1983 में राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) और नई दिल्ली में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) 1983 की जो बैठक हुई थी, उसमें भी बल के कमांडो ने अचूक सुरक्षा प्रदान की थी। अब इसी बल ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय पुलिस कमांडो प्रतियोगिता (एआईपीसीसी) 2023 का 13वां संस्करण जीत लिया है। इस प्रतियोगिता में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस बलों की 24 शीर्ष कमांडों टीमों ने भाग लिया था।
विशिष्ट पर्वत-प्रशिक्षित बल आईटीबीपी ने पहली बार यह प्रतियोगिता जीती है। 11-दिवसीय इस प्रतियोगिता का उद्घाटन 21 मार्च को हुआ था, जबकि 31 मार्च को इसका समापन समारोह मानेसर में हुआ है। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता देश के पुलिस बलों के बीच सबसे कठिन पेशेवर प्रतियोगिताओं में से एक है। प्रतियोगिता ट्रॉफी के अलावा, आईटीबीपी टीम ने फायरिंग में सर्वश्रेष्ठ और रणनीति में सर्वश्रेष्ठ ट्रॉफी भी जीती। प्रतियोगिता का आयोजन अखिल भारतीय पुलिस खेल नियंत्रण बोर्ड (एआईपीएससीबी) द्वारा किया गया था। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता को पुलिस बलों की शारीरिक फिटनेस, सामरिक कौशल, मानसिक मजबूती, निशानेबाजी कौशल, नेतृत्व गुणों और श्रेष्ठ संगठन भावना पर सर्वश्रेष्ठ पुलिस कमांडो टीम का आकलन करने के लिए डिजाइन किया गया है। प्रतियोगिता का यह संस्करण महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे दो संस्करणों (11वें और 12वें) के अंतराल के बाद आयोजित किया गया था, जो कि कोविड-19 के कारण आयोजित नहीं किए गए थे।
वर्ष 2009 में शुरू हुई अखिल भारतीय पुलिस कमांडो प्रतियोगिता का पहला संस्करण मध्यप्रदेश के टेकनपुर में आयोजित किया गया था। इस प्रतियोगिता को देश के पुलिस बलों के बीच शीर्ष पेशेवर प्रतियोगिता माना जाता है। 1962 के बाद से सबसे कठिन जलवायु और इलाके की परिस्थितियों में भारत-चीन सीमाओं की रक्षा करने के अलावा, आईटीबीपी का देश में बेहतरीन कमांडो तैयार करने का एक विशिष्ट इतिहास रहा है। इसी वजह से 80 के दशक में जब जटिल सुरक्षा चुनौतियों रही थीं, तब एशियाई खेलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी कमांडो ने संभाली थी। इसके बाद 1983 में राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) और नई दिल्ली में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) 1983 की बैठक के दौरान भी बल के कमांडो ने सुरक्षा प्रदान की थी।
इसके अलावा फोर्स ने 2005 से 2008 तक अफगानिस्तान में डेलाराम-जरंज परियोजना को सुरक्षित करने के लिए अपनी कमांडो इकाइयां भेजी थीं। बल ने 2005 से 2019 तक भारतीय-गठित पुलिस यूनिट-1 (आईएनडी एफपीयू-1) के लिए अपने कमांडो को अफ्रीका के कांगो में भी भेजा था। आईटीबीपी कमांडो ने शीर्ष पेशेवर कौशल के साथ अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास की रक्षा की है। बल ने गत वर्षों में वहां कई आतंकवादी हमलों को विफल किया है। आईटीबीपी, अपने रैंकों को विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों में प्रदान किए जाने वाले सबसे कठिन प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है। इस बल को सीमाओं के कुछ सबसे कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात किया गया है।