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नक्सल प्रभावित इलाके में आईटीबीपी संग आदिवासियों की ऐसी पार्टी नहीं देखी होगी, अफसरों की कुर्सी पर बैठे बच्चे

Mon, 06 Jul 2020 10:06 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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लोगों के साथ भोजन करता आईटीबीपी का जवान - फोटो : अमर उजाला
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ये पार्टी बिल्कुल निराली है। यहां घना जंगल है, हर समय नक्सलियों के हमले का खतरा बना रहता है। इन सबके बावजूद यहां एक शानदार पार्टी आयोजित हुई। छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूझमाड़ के कोंडागांव, सोनपुर व नारायणपुर आदि इलाकों में तैनात आईटीबीपी की 53वीं वाहिनी ने यह संभव कर दिखाया। आदिवासियों और उनके बच्चों को नए कपड़े पहनाए गए। आईटीबीपी कर्मियों ने खुद उनके चेहरे पर मास्क लगाया। 

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बच्चों और बड़ों को चप्पल पहनाने का काम भी खुद आईटीबीपी कर्मियों ने किया। इसके बाद उन्हें लजीज भोजन कराया गया। बच्चों में जिम्मेदारी और देश सेवा का भाव जगाने के लिए उन्हें आईटीबीपी अधिकारी की कुर्सी पर बैठाया गया। ये सीन देखकर आदिवासियों ने कहा, आईटीबीपी का बहुत आभार। हम अपने बच्चों को उनके जैसा बनाएंगे।

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आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे बताते हैं कि जंगल में हमारे जवान सदैव आदिवासियों की मदद करने का प्रयास करते हैं। उनके इलाज की बात हो, कोरोना संक्रमण जैसी मुसीबत में आदिवासियों को खाना खिलाना हो, उन्हें बीमारी के बारे में जानकारी देना, सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब बताना और अन्य तरह से मदद करना, इसमें आईटीबीपी के अधिकारी और जवान आगे रहे हैं। उनके बच्चों को पढ़ाना या खेलने का प्रशिक्षण देना, ये सब काम आईटीबीपी करती रहती है। 



हाल ही में 53वीं वाहिनी का एक अन्य मानवीय चेहरा देखने को मिला। आईटीबीपी जवानों ने जंगल में रह रहे आदिवासियों के साथ पार्टी की। एक जवान के बच्चे का जन्मदिन था। चूंकि वह ड्यूटी पर था, इसलिए अपने बच्चे के पास नहीं जा सकता था। उसने आदिवासियों के बच्चों के साथ अपनी औलाद का जन्मदिन मनाया। उसने बच्चों को नए कपड़े पहनाए। उन्हें चप्पल जूते दिए। उसके बाद बच्चों को भरपूर खाना खिलाया गया।
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ये पार्टी अभी खत्म नहीं हुई है। वहां मौजूद आदिवासियों को यह अंदाजा नहीं था कि अगला नंबर उनका है। बच्चों को नए कपड़े पहनाने के बाद जवानों और अफसरों ने आदिवासियों को भी कपड़े दिए। बल्कि उन्हें खुद पहनाए। आईटीबीपी की इस मानवीय पहल को देखकर आदिवासी लोग कुछ ज्यादा नहीं बोल पा रहे थे। वे हाथ जोड़कर केवल धन्यवाद कर रहे थे।



आखिर में बच्चों को अफसरों की कुर्सी पर बैठाया गया। आईटीबीपी अधिकारियों का कहना है कि इससे उनमें देश सेवा की भावना जागृत होती है। एक बच्चे को जब कुर्सी पर बैठाया तो वह झिझकने लगा। चूंकि वहां अभिभावक भी मौजूद थे, इसलिए बच्चे कुर्सी पर बैठ गए। जैसे ही वे बच्चे कुर्सी पर बैठे तो आईटीबीपी कर्मियों ने तालियां बजाईं। यह सीन देखकर आदिवासी अपनी भर आई आंखें पोछने लगे। इसके बाद आईटीबीपी की टीम ने बच्चों और उनके परिजनों के पैरों को साफ किया। जिस किसी को प्राथमिक सहायता की जरूरत थी, उन्हें मुहैया कराई गई।

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