भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने रविवार को अपने 64 कांस्टेबलों को पदोन्नत किया है। आईटीबीपी की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, एनिमल ट्रांसपोर्ट कैडर के 64 कांस्टेबलों को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के आधार पर सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) के नव निर्मित पद पर पदोन्नत किया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ने कहा कि सभी 64 हेड कांस्टेबल अब अधीनस्थ अधिकारी (एसओ) बन जाएंगे, "सभी ने आईटीबीपी में 25-30 साल की सेवा की है"।
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने इसी साल जुलाई में एएसआई/एटी के पद के लिए भर्ती नियमों को अधिसूचित किया था। इसके तहत फास्ट-ट्रैक डीपीसी के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि पदोन्नति बिना किसी देरी के लागू हो। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे ने बताया, आईटीबीपी एनिमल ट्रांसपोर्ट कैडर के तहत कांस्टेबलों की पदोन्नति काफी समय से लंबित थी।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अपने महत्वपूर्ण पशु परिवहन विंग के लिए एक मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण योजना शुरू की है। यह भारत-चीन सीमा (एलएसी) के पहाड़ी इलाकों पर तैनात अपनी चौकियों और सैनिकों के लिए रसद आपूर्ति जीवन रेखा के रूप में काम करती है। योजना के तहत ही पिछले सप्ताह हेड कांस्टेबल रैंक के कुल 64 कर्मियों को सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) के पद पर पदोन्नत किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय, जिसके तहत आईटीबीपी कार्य करता है, ने इस साल जुलाई में सीमा सुरक्षा बल के पशु परिवहन (एटी) विंग में इन पहले एएसआई पदों के लिए भर्ती नियमों को अधिसूचित किया और एक विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने इन नियुक्तियों को संसाधित किया और दो महीने से भी कम समय में आदेश जारी किए।
दरअसल, पर्वतीय क्षेत्रों में युद्ध के लिए प्रशिक्षित बल की पशु परिवहन इकाई में खच्चर, टट्टू और याक शामिल हैं। यह 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात कर्मियों के लिए रसद, हथियार, राशन, ईंधन समेत अन्य आवश्यक चीजें पहुंचाने के लिए अहम है। आईटीबीपी की सीमा चौकियां 18,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर कुछ सबसे दुर्गम और दूरस्थ स्थानों पर स्थित हैं। इन स्थानों पर तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। यहां भारी हिमपात भी होता है।