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ITBP के 'ओसामा हंटर कुत्तों' को मिला नया नाम, लद्दाख और गलवां घाटी से जुड़ गया नाता

Sat, 05 Dec 2020 01:26 AM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अपने नवजात ‘बेल्जियन मेलिनोइस’ लड़ाकू कुत्तों का नाम गलवान, श्योक और रेजांग जैसे लद्दाख क्षेत्र के विभिन्न अहम भौगोलिक स्थानों के नाम पर रखा है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo
यह अनोखा निर्णय द्विआयामी लक्ष्य को लेकर लिया गया है, पहला सामान्यत: फौजी कुत्तों को दिए जाने वाले सीजर या एलिजाबेथ जैसे नामों से बचना और दूसरा, स्थानीय लोगों और उन सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करना जो राष्ट्रीय कर्तव्य पर दुर्गम ऊंचाइयों पर तैनात हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
ये कुत्ते पंचकूला के भानु में बल के ‘नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग्स’ में सितंबर -अक्तूबर में पैदा हुए थे और उनके नाम एने-ला, गलवान, सासोमा, श्योक, चांग- चेनमो, चिप-चाप, दौलत, रेजांग, रैंगो, चारडिंग, इमिस, युला, सृजप, सुल्तान चुकसू, मुखपरी, चुंग-थुंग और खारदूंगी रखे गए हैं।

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indian army dog squad - फोटो : ANI
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये लद्दाख क्षेत्र के जगह हैं, जहां भारत तिब्बत सीमा पुलिस चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा की चौकसी के अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी के तहत तैनात है। अधिकारी ने कहा कि इन छोटे के-9 सैनिकों को शतप्रतिशत देसी नाम देने और वो भी कि बल द्वारा चौकसी किये जाने वाले क्षेत्रों के नाम पर उनके नाम रखने से बल की लड़ाकू कुत्ता शाखा का लक्ष्य अपने धरोहर एवं मूल्यों को सम्मान प्रदान करना है।
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indian army dog squad - फोटो : ANI
कुत्तों की यह प्रजाति तब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आई, जब उसने 2011 में पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए चलाए गए अभियान में अमेरिकी नौसेना के सील सैनिकों की मदद की। बाद में यह प्रजाति ‘ओसामा हंटर्स’ नाम से प्रसिद्ध हो गई।
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