इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने आठ महिला अधिकारियों के एक बैच को बल में शामिल करने का फैसला किया है। यह बैच केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच पहला ऐसा बैच होगा जिसे नक्सल विरोधी अभियानों समेत विभिन्न सुरक्षा कार्यक्रमों में तैनात केनाइन स्क्वाड के लिए हैंडलर के तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। वर्तमान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में सभी डॉग हैंडलर पुरुष हैं।
चयनित की गईं आईटीबीपी की महिला अधिकारी कान्स्टेबल रैंक की हैं और पर्वतीय युद्ध के लिए प्रशिक्षित बल के पशु परिवहन कैडर में तैनात हैं। इस बल की स्थापना 1962 में चीनी आक्रामकता को देखते हुए की गई थी।
आईटीबीपी की मुख्य जिम्मेदारी चीन के साथ 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की पहरेदारी करना है। इसके अलावा आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी यह बल विभिन्न जिम्मेदारियां संभालता है। इनमें नक्सल विरोधी अभियान और हाई प्रोफाइल कार्यक्रमों व वीवीआईवी यात्राओं के दौरान जांच आदि कार्य शामिल हैं। देश की सुक्षा में यह सशस्त्र बल बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मई के अंतिम सप्ताह में शुरू होगा प्रशिक्षण
ये आठ महिलाएं 25 अधिकारियों की एक टीम का हिस्सा हैं जो इस महीने के अंतिम सप्ताह में आईटीबीपी संचालित नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग्स (एनटीसीडी) में प्रशिक्षण में शामिल होंगी। यह सेंटर हरियाणा के पंचकुला में स्थित है। इस फैसले को लेकर आईटीबीपी के डिप्टी इंस्पेक्टर (पशु चिकित्सा) जनरल सुधाकर नटराजन ने कहा कि यह मानसिकता को बदलने वाला और अवरोध तोड़ने वाला कदम है।
उन्होंने कहा कि यह सिद्ध करता है कि सुरक्षा बलों में ऐसा कोई भी काम नहीं है जिसे महिलाएं नहीं कर सकतीं। केनाइन विंग में महिलाओं को शामिल करने का निर्णय करके आईटीबीपी ने सही मायनों में मिथक को तोड़ा है। नटराजन ने आगे कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि डॉग हैंडलिंग में महिलाएं अपनी मातृत्व ज्ञान और सहानुभूति की भावना की वजह से पुरुषों के मुकाबले अधिक सफल साबित होंगी।