‘तोंद रहित मिशन’ के बारे में महानिदेशक ने कहा कि हमने बल के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) पद के कमांडरों और निचली रैंक के अधिकारियों के लिए कई तंदुरुस्ती कार्यक्रम शुरू किए हैं तथा इसके अलावा और कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देसवाल ने हाल में कम से कम चार पाठ्यक्रमों के समापन समारोह में शिरकत की है। उन्होंने बताया कि महानिदेशक ने सात घंटे में 42 किलोमीटर के कदमताल व्यायाम में भी हिस्सा लिया।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 58 वर्षीय अधिकारी ने इस साल की शुरुआत में ‘फिट इंडिया’ का संदेश प्रचारित करने के लिए राजस्थान के बीकानेर से जोधपुर तक 100 किलोमीटर लंबे मार्च को पूरा किया था और वह इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते रहते हैं। वर्ष 1984 बैच के आईपीएस और हरियाणा कैडर के अधिकारी कदमताल और तंदुरुस्ती के लिए जाने जाते हैं।
महानिदेशक ने कहा कि उन्होंने जवानों और उनके परिवारों की तंदुरुस्ती को ध्यान में रखकर आधारभूत अवंसरचना स्थापित करने के लिए अधिकारियों की टीम गठित की है। देसवाल ने कहा कि हम बल के परिसरों में परिवार केंद्रित अधिक अवसंरचना स्थापित करेंगे ताकि जवान और अधिकारी अपने परिवारों के साथ कुछ समय इसका इस्तेमाल कर सकें।
उन्होंने कहा कि तंदुरुस्ती को आदत बनाने के लिए हम अपने परिसरों में खुले में जिम स्थापित कर रहे हैं। इन जिम में व्यायाम करने के उपकरण होंगे जिनका इस्तेमाल जवान और उनके परिवार चलने, दौड़ने और साइकिल चलाने में कर सकते हैं।
देसवाल ने कहा कि हमारे पास काफी बड़े परिसर हैं। इनमें से कई 70 से 80 एकड़ में फैले हुए हैं और परिसर के चारों ओर बहुउद्देश्यीय ट्रैक है जिनका इस्तेमाल न केवल सुरक्षा गश्त के लिए, बल्कि अन्य कार्यों जैसे जॉगिंग और दौड़ने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे अधिकारी, जवान और उनके परिवार खुश रहें, ताकि वे उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा ग्रिड को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रेरित कर सकें।
देसवाल से दोनों बलों में कोविड-19 की स्थिति से निपटने और दिल्ली स्थिति आईटीबीपी के शिविर में पहला पृथक-वास केंद्र स्थापित करने, लॉकडाउन के बाद जवानों के अपनी इकाइयों में शामिल होने के आदेश के बारे में भी पूछा गया।
उन्होंने कहा कि मैं देश में अच्छे मौसम का दोस्त नहीं हूं, बल्कि विपरीत मौसम का दोस्त हूं। जब कोरोना वायरस महामारी जैसी बड़ी आपदा की बात हो तो मैं कठिन दायित्व को निभाने वाला पहला व्यक्ति रहना चाहूंगा।
महानिदेशक ने कहा कि दक्षिण पश्चिमी दिल्ली स्थित छावला में आईटीबीपी के 1,000 बिस्तरों की क्षमता वाला पृथक-वास केंद्र स्थापित करने को लेकर शुरुआत में वह आशंकित थे क्योंकि इससे बल में संक्रमण के मामले आ सकते थे लेकिन उनकी डॉक्टरों, पैरामेडिक और सफाईकर्मियों की टीम ने बेहतरीन काम किया और चीन के वुहान तथा इटली से विशेष विमान के जरिए लाए गए 42 विदेशियों सहित 1,200 लोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में आईटीबीपी का यह छोटा सा योगदान है। महानिदेशक ने कहा कि दोनों बलों में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों के मुकाबले ठीक होने वाले लोगों की संख्या अधिक है और चिंता की बात नहीं है।
गौरतलब है कि दोनों अर्धसैनिक बलों में कोरोना वायरस संक्रमण के कम से कम 795 मामले सामने आए हैं जिनमें से 649 कर्मी ठीक हो चुके हैं। कोरोना वायरस की वजह से इन बलों में चार लोगों की मौत हुई है।