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तैयारी: खेल-खेल में काले धन को सफेद बनाना नहीं होगा आसान, देश में एक नियम के तहत आ सकते है ई-गेमिंग

Mon, 18 Apr 2022 07:30 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि ऐसी इकाइयों का नियामक कौन होगा। इसका उत्तरदायित्व वित्तीय क्षेत्र के किसी नियामक को नहीं सौंपा जाएगा, क्योंकि जरूरी विशेषज्ञता नहीं होने की वजह से वह इस काम को पूरी शिद्दत से अंजाम नहीं दे पाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में युवा और बच्चों में बढ़ते ऑनलाइन गेम के प्रचलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने नियामक नियुक्त करने के प्रस्ताव पर विचार करना शुरु कर दिया है। ऑनलाइन गेमिंग में लगने वाले धन को सफेद बनाने के डर से सरकार ये कदम उठाने जा रही है। सरकार की इस पहल का ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि नियामक नियुक्त होने से इस क्षेत्र पर लटक रही अनिश्चितता की तलवार हट जाएगी और निवेश में भी इजाफा होगा।

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सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि ऐसी इकाइयों का नियामक कौन होगा। इसका उत्तरदायित्व वित्तीय क्षेत्र के किसी नियामक को नहीं सौंपा जाएगा, क्योंकि जरूरी विशेषज्ञता नहीं होने की वजह से वह इस काम को पूरी शिद्दत से अंजाम नहीं दे पाएगा। वहीं, सरकार ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए मौजूदा ढांचे की भी समीक्षा कर रही है। सरकार इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन गतिविधियों की अनुमति है या वित्तीय तंत्र से ये बाहर हैं। विभिन्न राज्यों ने इस क्षेत्र को लेकर अलग-अलग रवैया अपना रखा है।

इधर, ई-गेमिंग फेडरेशन (ईजीएफ) के जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने नियामक नियुक्त करने की पहल की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत में ई-गेमिंग उद्योग बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और इनका सालाना राजस्व लगातार बढ़ रहा है। भारत दुनिया के पांच शीर्ष मोबाइल गेमिंग बाजारों में शामिल है। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों से बात कर रहे हैं। ई-गेमिंग का नियमन करने वाली केंद्रीय एजेंसी के समक्ष सारे नियम-शर्तें स्पष्ट होंगे। इसलिए इसके लिए नियामक होना बेहद जरूरी है। इससे ऑनलाइन खेल से जुड़े सभी पक्षों को लाभ होगा।।
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नियामक की जरूरत पर ईजीएफ के सूत्रों का कहना है कि एक उद्योग के लिहाज से नियामक अनिश्चितता ठीक नहीं होती है। ऑनलाइन गेमिंग उद्योग की भी हालत फिलहाल ऐसी ही है। नियामक नहीं होने से इस खंड की कंपनियां पूरी क्षमता के साथ परिचालन नहीं कर पा रही हैं। अनिश्चितता की वजह से निवेशक भी अपने हाथ बंधे पा रहे हैं। अगर नियामक स्तर पर अनिश्चितता है तो वे निवेश करने या विस्तार के संबंध में कोई निर्णय कैसे ले पाएंगे।

ई-गेमिंग फेडरेशन ने ऑनलाइन रमी उद्योग को पारदर्शी, पेशेवर और उचित परिचालन मानदंड तैयार करने के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों के गेमिंग नियामकों के साथ काम किया है। ईजीएफ ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए एक स्वतंत्र स्व-नियामकीय इकाई है।

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