दुग्गल कहते हैं कि सरकार ने सभी कंप्यूटर के डेटा खंगालने की शक्तियां दस एजेंसियों को दे दी हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि इन आदेशों को जारी करने के पीछे असल वजह क्या है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 की धारा 69 (1) के तहत यदि सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं।
एकता और अखंडता को खतरा, जनहित में, सुरक्षा कारणों से, हमला या अन्य किसी बड़े अपराध का अंदेशा होने पर भी सुरक्षा एजेंसियां कंप्यूटरों से डेटा उठा सकती है। चिंता की बात यही है कि सरकार ने ये नहीं बताया कि अब इनमें से कौन सा खतरा आ गया है। किस वजह से सरकार दस एजेंसियों को यह अधिकार दे रही है। सरकार ने कानून, मौलिक अधिकार और संविधान को ताक पर रखकर यह आदेश जारी किया है।
कैसे होगा इसका दुरुपयोग, जानिये...
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले दिनों सीबीआई प्रकरण में फोन टेपिंग का खेल सारा देश देख चुका है। कथित तौर पर अधिकारी आपस में ही नहीं, बल्कि दूसरे अफसरों और प्राइवेट लोगों के फोन भी सर्विलांस पर लगवा देते हैं। अब तो इंटेलीजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सचिवालय (रॉ), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलीजेंस और दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह अधिकार कानूनी तौर से मिल गया है।
पहले भी ऐसे केस सामने आए हैं कि पराधिकृत अधिकारी के संज्ञान में जानकारी लाए बिना ही निचले या समकक्ष स्टाफ ने किसी का फोन सर्विलांस पर लगा दिया है। अब दस एजेंसियों के पास यह अधिकार होने से इसके दुरुपयोग की संभावना ज्यादा नजर आ रही है। पवन दुग्गल कहते हैं कि कुछ केस ऐसे होते हैं जो कई एजेंसियों के दायरे में आते हैं, जैसे सीबीआई क्राइम से संबंधित मामले की जांच कर रही है तो उसी मामले में ईडी पीएमएलए के तहत उस केस को जांच रही है।
यदि आरोपी बड़ा कारोबारी है तो डीआरआई और सीबीडीटी जैसी एजेंसियां भी उसमें शामिल हो सकती हैं। ऐसे में कौन सी एजेंसी किसके कंम्यूटर पर नजर रखेगी या फोन टेप करेगी, इसका कानूनी रुप से विभाजन बड़ा मुश्किल है। यहीं से इस अधिकार के दुरुपयोग की शुरुआत होगी।
कांग्रेस पार्टी के नेता जयवीर शेरगिल कहते हैं कि 2019 के चुनावों की दहलीज पर सरकार ने यह आदेश जारी किया है।इसका क्या मतलब है।मोदी सरकार 2019 की दौड़ जीतने के लिए इस अधिकार को भी अपना एक सारथी मानकर चल रही है।
कपिल सिब्बल कहते हैं कि उच्चतम न्यायालय ने निजता को मौलिक अधिकार बताया है। भारत सरकार 20 दिसंबर की मध्यरात्रि में आदेश जारी कर कहती है कि पुलिस आयुक्त, सीबीडीटी, डीआरआई, ईडी आदि के पास यह मौलिक अधिकार होगा कि वे हमारी निजता में दखल दे सकें। इससे ज्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता।
राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा है, मोदी जी, भारत को पुलिस स्टेट में बदलने से आपकी समस्या खत्म नहीं होने वाली है। एक अरब से अधिक भारतीय नागरिकों के समक्ष सिर्फ यही साबित होने वाला है कि आप किस तरह के असुरक्षित तानाशाह हैं।