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किसान आंदोलन के खिलाफ चल रही 'फेक न्यूज' से मुकाबला कर रहे सिडनी के आईटी पेशेवर

Mon, 14 Dec 2020 06:16 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
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सिंघु बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आईटी पेशे से छुट्टी लेकर अक्टूबर में कुछ निजी काम से भारत आए भावजीत सिंह की लंबे समय तक यहां रहने की कोई योजना नहीं थी। लेकिन, दिसंबर में भी वह यहीं हैं और किसान आंदोलन के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही फर्जी खबरों का ट्विटर पर मुकाबला कर रहे हैं।

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सिंह मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के निवासी हैं। वह ट्विटर हैंडल 'ट्रैक्टर2ट्विटर' के जरिए अभियान चला रहे हैं। 28 नवंबर से अब तक पूरी दुनिया के 25 लाख लोग इसे देख चुके हैं। उन्होंने कहा, 'मैं निजी काम से अक्तूबबर के आखिर में भारत आया था लेकिन किसान आंदोलन शुरू हो गया तो मैं यहीं रुक गया।'


वह कहते हैं कि उनका इरादा प्रदर्शन की सही सूचनाएं प्रसारित करना है क्योंकि कई लोग आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं। सिंह के मित्र और स्वयंसेवक जसप्रीत सिंह ने कहा, 'पैसे के बदले और किसी खास हित से प्रेरित यूजर्स ने ट्विटर का अतिक्रमण किया है। हमारा अभियान इसका मुकाबला करने के लिए है।'
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जसप्रीत ने कहा, 'किसान ट्विटर का इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं। हम उन्हें इससे जोड़ना चाहते हैं। हमारे पास आईटी सेल नहीं है और सभी ट्वीट वास्तविक हैं।'

भावजीत ने कहा कि दुनिया यह जानने के लिए कि भारत में क्या हो रहा है, फेसबुक या व्हाट्सएप नहीं बल्कि ट्विटर पर देखती है कि क्या ट्रेंड कर रहा है। जब किसान विरोधी अभियान चरम पर था, तब हमने सोचा कि यह किसानों के ट्रैक्टर से ट्विटर पर जाने का सही समय है और इस तरह ‘ट्रैक्टर2ट्विटर’ का विचार आया।

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