चीन से आयात के विकल्प की सबसे ज्यादा तलाश इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को है। इस उद्योग की रीढ़ माने जा रहे डायोड, ट्रांजिस्टर, सेमीकंडक्टर, फोटोसेंसिटिव सेमीकंडक्टर आदि के कुल आयात में 63.4 फीसदी की आपूर्ति अकेले चीन करता है। उद्योग जगता का कहना है कि लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक सामान में डायोड या सेमीकंडक्टर डिवाइस का इस्तेमाल होता है। साथ ही उत्पादों की मरम्मत में भी इसकी जरूरत होती है।
साल 2018 में चीन से इन सामानों का आयात 44,327 करोड़ रुपये का था। पिछले महीने से इनका कंसाइनमेंट नहीं आ रहा और बाजार में किल्लत बढ़ रही, जिससे स्पेयर महंगा हो गया है। उद्योग जगत ने इसका विकल्प जापान, मलयेशिया और अमेरिका को बताया है।
नौवहन उद्योग के जानकारों का कहना है कि चीन से आयात के मुकाबले अमेरिका से सामान मंगाने में दोगुना समय लगता है। अगर चीन के पश्चिमी तट से किसी बंदरगाह तक सामान लाना हो तो करीब 15 दिन का समय लगता है, जबकि अमेरिका से सीधे भारतीय बंदरगाह पर सामान लाने में ही 25 से 30 दिन का समय लग जाता है। साथ ही इसकी परिवहन लागत में भी इजाफा हो जाता है, जिसका असर उत्पाद पर पड़ सकता है।