किसी भी संक्रामक या गैर संक्रामक बीमारी की समय रहते पहचान और इलाज के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने देश भर में उन उपचार मानक प्रोटोकॉल को अनिवार्य कर दिया है जिसे पिछले कुछ वर्षों के दौरान नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जारी किया है।
सरकार का यह फैसला देश के प्रत्येक डॉक्टर और अस्पताल पर लागू होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव डॉ. अपूर्व चंद्रा ने राज्यों को लिखे पत्र में कहा है कि इन प्रोटोकॉल के बारे में सभी अस्पताल, क्लीनिक या फिर नर्सिंग होम तक पहुंचाने पर काम किया जाए ताकि प्रत्येक डॉक्टर और उनके क्लीनिक तक चिकित्सा के नए मानक पहुंच सकें। नई दिल्ली में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से तत्काल इस पर कार्य करने के लिए कहा है।
28 विशेषज्ञता में 157 प्रोटोकॉल जारी
अक्सर छोटे या मध्यम शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता है। अलग अलग लक्षणों के चलते स्थानीय डॉक्टर भी असमंजस में रहते हैं और मरीज स्वस्थ महसूस नहीं कर पाते। इससे निपटने के लिए 2019 में आईसीएमआर ने अलग-अलग बीमारियों और डॉक्टरों की विशेषज्ञता आधार पर एक जैसे उपचार प्रोटोकॉल बनाने का निर्णय लिया। अब तक आईसीएमआर किडनी, लिवर, ईएनटी, हार्ट सहित करीब 28 विशेषज्ञता में 157 प्रोटोकॉल जारी कर चुका है।