अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एच1 बी वीजा को लेकर नीतियों पर भारतीय इंजीनियर खासे नाराज हैं। इंफोसिस और बाकी कंपनियां छटनी के नाम पर अनुभव इंजीनियरों को लगातार निकाले जा रही है। चर्चित तकनीकी कंपनी कॉगन्जिेंट से निकाली जा रहीं स्वपना भौसले ने ट्रंप और उनकी नीतियों पर खासी नाराजगी जाहिर की है।
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक भौसले ने कहा कि किसी प्रोजेक्ट के बीच में से काम पर निकाले जाना बेहद शर्मनाक है। ट्रंप की नीतियों और कंपनियों के इस व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए स्वपना जैसे कई अनुभवी इंजनियरों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें ट्रंप का पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
भौसले के अलावा बंगलूरू, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और कोलकाता के हजारों इंजीनियर इन व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वे आईटी लेबर यूनियन बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। कॉगन्जिेंट की कोलकाता फर्म से निकाले जाने वाले पंकज कुमार सिंह का कहा है कि लोग नाराज हैं। उन्होंने कंपनी को कई साल दिए फिर भी उन्हें निकाल दिया गया।
दरअसल, ट्रंप ने अमेरिकी इंजीनियरों की नौकरियों में वापसी के लिए एच1 बी वीजा की फिर समीक्षा के आदेश दिए हैं। इससे भयभीत हुई कंपनियां अमेरिका से भारतीय इंजीनियरों को या तो देश वापस बुला रही हैं या उनकी नौकरियां छीन रही हैं। इतना ही नहीं इसका सीधा असर भारत में कामयाब हो चुकी आईटी कंपनियों पर भी दिख रहा है।
बताया जा रहा है कि इंफोसिस इस साल करीब 10 हजार अमेरिकी इंजीनियरों को हायर करने जा रही है। बंगलूरू की टेलेंट बेस्ड फर्म द हेडहर्न्टस के चेयरमेन का कहना है कि अभी जो हालात हैं वे कुछ भी नहीं। अभी तो निकाले जाने वालों की संख्या 15 लाख से 2 लाख तक जाने वाली है।