राज्यसभा में बृहस्पतिवार को बच्चों और महिलाओं में बढ़ते कुपोषण और कोरोना महामारी के चलते छात्रों में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दे उठाए गए। विभिन्न दलों के सांसदों ने इन पर चिंता जताई और सरकार से इन मामलों के समाधान के लिए उचित कदम उठाने की मांग की।
भाजपा सांसद केसी रामामूर्ति ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में बंगलूरू में सुप्रीम कोर्ट की पीठ स्थापित करने की मांग को लेकर शून्यकाल नोटिस दिया। शून्यकाल के दौरान सांसद सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उठा सकते हैं।
भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने महिलाओं और बच्चों में कुपोषण के बढ़ते मामलों को लेकर शून्यकाल नोटिस दिया। उन्होंने कुपोषण उन्मूलन मिशन शुरू करने और एक स्वतंत्र कुपोषण उन्मूलन प्राधिकरण गठित करने की मांग की।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और समन्वित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ये कुपोषण की गंभीर स्थिति को बयान करते हैं। उन्होंने कहा कि कुपोषण कोई बीमारी नहीं बल्कि सामाजिक समस्या है और इससे निपटने के लिए सोच में बदलाव की जरूरत है।
उन्होंने राष्ट्रीय कुपोषण उन्मूलन अभियान चलाने का सुझाव देते हुए इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल शक्ति और आयुष मंत्रालय सहित कुछ मंत्रालयों को शामिल करने की मांग की।
उन्होंने लक्ष्य निर्धारित कर जिला स्तर पर इस दिशा में काम करने का सुझाव दिया और सरकार से एक स्वतंत्र कुपोषण उन्मूलन प्राधिकरण स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुपोषण पर नियंत्रण करने के लिए हमें जमीनी स्तर पर मिशन मोड में काम करना होगा।
कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कोरोना के मद्देनजर देश भर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण शिक्षा से वंचित रहे प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के गरीब छात्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस वजह से कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली तो कई अवसाद में चले गए।
उन्होंने कहा कि इस दौरान ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया गया लेकिन स्मार्टफोन या टैबलेट न हो पाने और इंटरनेट के अभाव में कई छात्रों को शिक्षा से वंचित होना पड़ा।
उन्होंने ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने की स्थिति में गरीब छात्रों के लिए वाईफाई सुविधायुक्त स्थानीय सामुदायिक केंद्रों की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। कोविड-19 की दूसरी लहर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पहले कि छात्र अवसाद में जाए और स्थितियां गंभीर हो, केंद्र सरकार को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक बुलानी चाहिए ताकि गरीब छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो।
राजद के एक सदस्य ने परमार्थ (चैरिटेबल) शैक्षणिक संस्थानों को आय कर की तर्ज पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से मुक्त करने की मांग उठाई। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए राजद के अहमद अशफाक करीम ने कहा कि परमार्थ शैक्षणिक संस्थान आय कर से मुक्त है लेकिन ऐसे संस्थानों पर भवन निर्माण और अवसंरचना विकास पर जीएसटी का बोझ पड़ता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को इनपुट टैक्स क्रेडिट भी नहीं मिलता। इसका फायदा परमार्थ शैक्षणिक संस्थानों को ना होकर सीधे बिल्डर और सामग्री आपूर्ति करने वालों का मिलता है। इसलिए मेरा सरकार से आग्रह है कि आयकर की तरह शैक्षणिक संस्थाओं को भी जीएसटी से मुक्त किया जाना चाहिए।