फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीएमसी विवाद: राज्यसभा में उठा धनखड़ का मुद्दा, सांविधानिक संस्थाओं की आलोचना करने का लगा आरोप

Sat, 12 Feb 2022 02:35 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि धनखड़ संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। राज्यसभा में लाया गया मौलिक प्रस्ताव सदन में स्वीकृत कराना होगा।
विज्ञापन
राज्यसभा - फोटो : राज्यसभा
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राज्यसभा में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का मुद्दा उठाया गया। तृणमूल कांग्रेस सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने नियम 170 के तहत सदन में मौलिक प्रस्ताव दिया। इसमें धनखड़ पर चुनी हुई सरकार की सांविधानिकता को चुनौती देने का आरोप लगाया गया है।

विज्ञापन


रॉय आरोप लगाया कि राज्यपाल सांविधानिक रूप से चुनी गई सरकार के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। वह सरकार के नियमित कार्यों में दखल दे रहे हैं। वह सरकार के कार्यों और नीतियों की सार्वजनिक तौर पर आलोचना कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह प्रिंट, टीवी और सोशल मीडिया पर भसी बयान जारी कर रहे हैं।

उन्होंने अपने प्रस्ताव में राष्ट्रपति से (संविधान के नियम 156 के तहत) राज्यपाल को वापस बुलाने का आग्रह किया। टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि धनखड़ संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। राज्यसभा में लाया गया मौलिक प्रस्ताव सदन में स्वीकृत कराना होगा। प्रस्ताव सभापति द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी।
विज्ञापन


वापस लिए गए तीन कृषि कानूनों को भविष्य में लाने की कोई योजना नहीं : तोमर
केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार की वापस लिए गए तीन कृषि कानूनों को भविष्य में फिर से लाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह बात कृषि कानूनों को फिर से लाए जाने संबंधी सवाल पर कही।

एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में मृत किसानों के परिजनों को मुआवजा देने का मामला संबंधित राज्य सरकारों से जुड़ा है। पिछले साल 19 नवंबर को प्रधानमंत्री ने देश के नाम संबोधन में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया था।

पीएम-किसान योजना पर तोमर ने कहा कि 8 फरवरी 2022 तक 11.78 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को इसके तहत 1.82 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की गई है। इनमें से 48.04 लाख इसके लिए अयोग्य पाए गए। इसलिए इस योजना का 11.30 करोड़ किसानों को फायदा हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें