अंतरिक्ष में सबसे भारी उपग्रह सैटेलाइट जीएसएलवी मार्क-3 की सफल लॉन्चिंग के बाद भारत ने एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। जीएसएलवी मार्क-3 की सफल लॉन्चिंग के बाद इसरो की नजर अब कार्टोसैट सीरीज की सैटेलाइट पर है। इसरो ने इस प्रोजेक्ट को 'आई इन द स्काई' नाम दिया है। इसरो ने इसे यह नाम इसकी सर्विलॉन्स क्षमता के कारण दिया है।
550 किग्रा के उपग्रह को कार्टोसैट-2 को पीएसएलवी-सी 38 रॉकेट द्वारा प्राक्षेपित किया जाएगा। कार्टोसैट सीरीज के उपग्रह एक स्मार्ट रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट होते हैं। इस सैटेलाइट में पैन कैमरा लगे होते है जो इलेक्ट्रोमैगनेटिक स्पेट्रम के विजिबल रिजन तक पृथ्वी की ब्लैक और व्हाइट तस्वीरें लेता है।
इस उपग्रह के माध्यम से भारतीय सेना को एक नई ताकत मिलेगी। इसकी मदद से सेना की सर्विलॉन्स ताकत बढेगी। सेना को उपग्रह की मदद से बॉर्डर पर आतंकियों के लॉन्चिंग पैड की तस्वीरें और जानकारी मिलेगी, जिससे आतंकियों के लड़ने में और घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जा सकेगा।
कार्टोसैट सैटेलाइट की मदद से कार्टोग्रैफिक ऐप्लिकेशन, अर्बन और रूलर ऐप्लिकेशन, कोस्टल जमीन और उनके इस्तेमाल, यूटिलिटी मैनेजमेंट, रोड मॉनिटरिंग आदि को मैनेज किया जा सकेगा। इसरो के सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में कार्टोसैट तस्वीरों की मांग बढ़ी है।