भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) साल 2025 में अपना मिशन वीनस (शुक्र ग्रह अभियान) लांच करेगा, जिसमें फ्रांस भी हिस्सेदारी करेगा। यह दावा फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस ने बुधवार को किया। हालांकि इसरो की तरफ से सीएनईएस के इस दावे का कोई जवाब नहीं दिया गया है।
फ्रांसीसी एजेंसी के मुताबिक, इसरो ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के बाद फ्रांसीसी साइंटिफिक रिसर्च सेंटर सीएनआरएस को इस मिशन की तैयारी के लिए चुना है। इस सेंटर को चुने जाने का कारण यहां वायरल (वीनस इंफ्रारेड एटमास्फियर गैस लिंकर) उपकरण का मौजूद होना है।
यह उपकरण रूसी संघीय अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकास्मॉस और लैटमॉस एटमास्फियर, एनवायरनमेंट्स एंड स्पेस ऑब्जर्वेशंस लैबोरेटरली ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। सीएनईएस ने यह भी कहा कि पहली बार कोई भारतीय खोजी मिशन फ्रांसीसी पेलोड भी अपने साथ लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। इस अभियान में सीएनईएस फ्रांसीसी हिस्सेदारी के समन्वय और तैयारी की जिम्मेदारी संभालेगा।
इसरो के चेयरमैन के. सिवन और सीएनईएस के अध्यक्ष जीन-येव्स ली गॉल उन क्षेत्रों को लेकर चर्चा और समीक्षा की है, जिनमें भारत और फ्रांस अंतरिक्ष में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। अमेरिका व रूस के अलावा फ्रांस उन तीन देशों में से एक है, जिनके साथ भारत ने परमाणु, अंतरिक्ष व रक्षा के रणनीतिक क्षेत्रों में साझीदारी की है।
मार्च, 2018 में दोनों देशों ने अंतरिक्ष सहयोग के लिए संयुक्त दृष्टिपत्र भी जारी किया था। इसके अलावा दोनों देश इसरो के महत्वाकांक्षी गगनयान प्रोजेक्ट में भी मिलकर काम कर रहे हैं। इस मिशन के जरिये भारत 2022 में पहली बार तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजेगा। सितंबर, 2018 में दोनों देशों ने इस काम के लिए एक वर्किंग ग्रुप भी गठित किया था।