परमाणु बम विस्फोट (सांकेतिक तस्वीर)
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उत्तर कोरिया अपने मिसाइल व परमाणु परीक्षणों को लेकर एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार उत्तर कोरिया के खतरे को लेकर दावा अमेरिका, दक्षिण कोरिया या जापान ने नहीं बल्कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के वैज्ञानिकों ने किया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों के अनुसार 2017 में प्योंगयांग ने जो परमाणु परीक्षण किया था, वह इतना ज्यादा ताकतवर था कि उससे जमीन भी कुछ मीटर तक खिसक गई थी। यही नहीं इस शोध में यह भी पाया गया कि यह बम 1945 में जापान के शहर हिरोशिमा पर गिराए गए बम से 17 गुना ज्यादा शक्तिशाली था। हिरोशिमा पर गिराए गए बम की क्षमता 15 किलोटन थी जबकि इसकी क्षमता 245 से 271 किलोटन थी।
गुजरात के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष उपयोग केंद्र में इसरो के वैज्ञानिक केएम श्रीजीत के नेतृत्व में शोध किया गया। इस शोध में 2003 में उत्तर कोरिया के परमाणु संधि से अलग होने के बाद की गतिविधियो का आकलन किया गया। उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन ने पांच बार जमीन के भीतर परीक्षण किया और 3 सितंबर 2017 को संभवत: हाइड्रोजन बम तैयार कर लिया।
सेटेलाइट डाटा का इस्तेमाल :
'जर्नल जियोफिजिकल जर्नल इंटरनेशनल' में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार पारंपरिक तौर पर भूकंप की निगरानी वाले मापक यंत्रों से ही परमाणु परीक्षणों की पहचान की जाती है। हालांकि उत्तर कोरिया से भूकंपीय डाटा उपलब्ध नहीं होने की वजह से इसरो की टीम ने सेटेलाइट डाटा से जानकारी जुटानी शुरू की। टीम ने जापानी उपग्रह एएलओएस-2 के आंकड़ों और इनएसएआर तकनीक का इस्तेमाल किया।
पहाड़ की चोटी तक हिल गई
इसरो की टीम को जो आंकड़े मिले, उससे पता चला कि धमाका इतना ज्यादा शक्तिशाली था कि उससे पहाड़ की चोटी का स्थान तक भी हिल गया। धमाके की वजह से वहां 66 मीटर अर्धव्यास का गड्ढा बन गया।