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Spadex Docking: इसरो के स्पैडेक्स उपग्रहों की दूसरी डॉकिंग भी सफल; केंद्रीय मंत्री बोले- आगे और परीक्षण होंगे

Mon, 21 Apr 2025 10:26 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ISRO Spadex Docking Mission Update: इसरो ने 30 दिसंबर 2024 की रात 10 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र यानी शार से स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट (स्पैडेक्स) लॉन्च किया था। इसके बाद 16 जनवरी को इसरो ने पहली बार दो उपग्रहों की सफलतापूर्वक डॉकिंग की थी।
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उपग्रह डॉकिंग प्रयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इसरो के स्पैडेक्स उपग्रहों ने सफलतापूर्वक दूसरी डॉकिंग पूरी कर ली है। दरअसल, अंतरिक्ष को उपग्रहों को एक साथ जोड़ने की प्रक्रिया को डॉकिंग और अलग करने की प्रक्रिया को अनडॉकिंग कहते हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, 'यह बताते हुए खुशी हो रही है कि उपग्रहों की दूसरी डॉकिंग सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। जैसा कि पहले बताया गया था कि पीएसएलवी-सी60 स्पैडेक्स मिशन 30 दिसंबर 2024 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। इसके बाद उपग्रहों को पहली बार 16 जनवरी 2025 को सुबह 06:20 बजे सफलतापूर्वक डॉक किया गया। इसे 13 मार्च 2025 को सुबह 09:20 बजे सफलतापूर्वक अनडॉक किया गया। अगले दो हफ्तों में आगे के प्रयोगों की योजना बनाई गई है।

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यह भी पढ़ें- इसरो ने रचा इतिहास: 'स्पेडेक्स मिशन' के तहत उपग्रहों की सफल 'डॉकिंग', भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश

विश्व के चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल भारत
इससे पहले 16 जनवरी को भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और लंबी छलांग लगाकर विश्व के चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया था। इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट’ (स्पेडेक्स) के तहत उपग्रहों की ‘डॉकिंग’ सफलतापूर्वक की थी। इसरो ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा था, 'भारत ने अंतरिक्ष इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया है। सुप्रभात भारत, इसरो के स्पेडेक्स मिशन ने ‘डॉकिंग’ में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस क्षण का गवाह बनकर गर्व महसूस हो रहा है।' इसके साथ ही अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन गया था। यह प्रौद्योगिकी भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं जैसे चंद्रमा पर भारतीय मिशन, चंद्रमा से नमूने वापस लाना, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) का निर्माण और संचालन आदि के लिए जरूरी है।
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मिशन के फायदे
  • भारत की योजना 2035 में अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की है। मिशन की सफलता इसके लिए अहम है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन में पांच मॉड्यूल होंगे जिन्हें अंतरिक्ष में एक साथ लाया जाएगा। इनमें पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च किया जाना है।
  •  यह मिशन चंद्रयान-4 जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए भी अहम है...यह प्रयोग उपग्रह की मरम्मत, ईंधन भरने, मलबे को हटाने और अन्य के लिए आधार तैयार करेगा।
  • यह तकनीक उन मिशनों के लिए अहम है, जिनमें भारी अंतरिक्ष यान और उपकरण की जरूरत होती है, जिन्हें एक बार में लॉन्च नहीं किया जा सकता।


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