अब तक की सबसे वजनी भारतीय कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसेट-29 शनिवार को आखिरकार अपनी तय कक्षा में सही कोण पर स्थापित हो गई। इस सैटेलाइट को इसरो ने अपने ‘बाहुबली’ जीएसएलवी मॉक-3 रॉकेट के जरिए 14 नवंबर को श्रीहरिकोटा स्थित स्पेस लांच सेंटर से भेजा था, जिसने इसे पृथ्वी की पहली कक्षा तक पहुंचा दिया था। अब जल्द ही इस सैटेलाइट के जरिए जम्मू-कश्मीर के दुर्गम क्षेत्रों में भी हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा मिलने लगेगी।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को ट्वीट करते हुए बताया कि जीसेट-29 को लिक्विड अपोजी मोटर इंजन की मदद से तीसरी और फाइनल कक्षा में तय स्थान पर स्थापित कर दिया गया है। सुबह 9.57 बजे शुरू किए गए इंजन को इसके लिए 207 सेकंड तक चलाया गया।
बता दें कि अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद यह तीसरी बार सैटेलाइट को सही स्थान तक पहुंचाने के लिए इंजन को चलाया गया। इससे पहले इसरो के वैज्ञानिकों ने बृहस्पतिवार सुबह 8.34 बजे सैटेलाइट का इंजन 4875 सेकंड (1.35 घंटे) तक चलाकर पहली कक्षा पार की थी, फिर शुक्रवार को सुबह 10.27 बजे सैटेलाइट का इंजन दोबारा 4988 सेकंड तक चलाकर दूसरी कक्षा पार की गई थी। शनिवार को उसे तय कोण पर स्थापित करने के लिए महज 207 सेकंड ही इंजन चलाना पड़ा।