भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज 260 टन वजनी पीएसएलवी-सी62 रॉकेट से उपग्रह अन्वेषा समेत 15 अन्य सैटेलाइट की लॉन्चिंग की, लेकिन प्रक्षेपण के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आ गई। यह इस साल का पहला प्रक्षेपण था। आज श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह अन्वेषा व 14 अन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाना था। हालांकि, प्रक्षेपण के बाद रॉकेट तय रास्ते से भटक गया और मिशन की विफलता का संकेत मिला।
लगातार दूसरी बार रास्ते से भटका पीएसएलवी रॉकेट
प्रक्षेपण के करीब पांच घंटे बाद समाचार एजेंसी पीटीआई ने 03:11 बजे सूत्रों के हवाले से बताया कि उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने का मिशन पूरा नहीं हो सका और सभी 16 उपग्रह अंतरिक्ष में खो गए। सूत्रों ने यह भी बताया कि पीएसएलवी मिशन तीसरे चरण के दौरान लगातार दूसरी बार विफल हुआ है। इसरो ने अपने 'X' हैंडल पर मिशन की विफलता की पुष्टि करते हुए कहा, 'पीएसएलवी-सी62 मिशन में यान के पीएस3 (तीसरे चरण) के अंत में एक असामान्य स्थिति उत्पन्न हो गई। विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है।
मई 2025 में भी खराबी के कारण नाकामी
इससे पहले मई 2025 में भी पीएसएलवी रॉकेट में परेशानी आई थी। पिछले प्रयास- PSLV-C61-EOS-09 के प्रक्षेपण के दौरान 'मोटर प्रेशर की समस्या' हुई थी। इसी कारण मिशन सफल नहीं हो पाया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक मोटर केस के चैंबर प्रेशर में गिरावट आई थी।
पीएसएलवी रॉकेट चार चरणों का होता है
इससे पहले शुरुआती बयान में इसरो चीफ ने कहा, वैज्ञानिकों की टीम जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के आखिर में एक गड़बड़ी हुई। इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने कहा, 'हमने पीएसएलवी सी62 ईओएस-एन1 मिशन के प्रक्षेपण का प्रयास किया। पीएसएलवी रॉकेट चार चरणों का होता है। तीसरे चरण की समाप्ति से ठीक पहले तक सबकुछ सामान्य रहा, इसके बाद कुछ परेशानी देखी गई। हम जल्द ही अपडेट साझा करेंगे।'
अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट के प्रक्षेपण के बाद परेशानी
दरअसल, इसरो के PSLV-C62, जिसमें एक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट और कई कमर्शियल पेलोड थे, उसमें उड़ान के तीसरे स्टेज के दौरान एक गड़बड़ी हुई। 44.4 मीटर लंबा चार स्टेज वाला रॉकेट सुबह 10.18 बजे तय समय पर लॉन्च हुआ था। इस मिशन का मकसद एक प्राइमरी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट और कई को-पैसेंजर सैटेलाइट्स को 512 किमी की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करना था।
ISRO के अनुसार पहले दो स्टेज ने उम्मीद के मुताबिक काम किया, और तीसरे स्टेज (PS3) के आखिर में यान में 'गड़बड़ी' महसूस हुई। मिशन कंट्रोल सेंटर में टीम को संबोधित करते हुए ISRO प्रमुख नारायणन ने कहा, 'PSLV एक चार स्टेज वाला यान है, जिसमें दो सॉलिड स्टेज और दो लिक्विड स्टेज हैं। तीसरे स्टेज के आखिर तक यान का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक था। तीसरे स्टेज के आखिर के करीब हमने यान में अधिक गड़बड़ी देखी और उसके बाद उड़ान के रास्ते में एक भटकाव देखा गया।' बता दें कि यह मिशन इस साल का पहला लॉन्च था, जो ISRO की कमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड द्वारा हासिल किए गए एक अनुबंध का हिस्सा था।
दरअसल, इस मिशन के तहत अन्वेषा के जरिए भारत की निगरानी क्षमताओं को मजबूती करना है। जिसे भारत का सीसीटीवी भी कहा जा रहा है। इसकी मदद से हम दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकेंगे।
दुश्मन की निगरानी करेगा उपग्रह अन्वेषा
उपग्रह अन्वेषा पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए तस्वीरें लेगा। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं, जो साधारण कैमरों से ज्यादा स्मार्ट हैं। यह आसमान से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। इस लॉन्च में दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर वाले पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट का इस्तेमाल किया गया था। यह मिशन पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान थी।
- अन्वेषा को धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट में स्थापित किया जाता।
- इससे आतंकियों से लेकर घुसपैठियों के साथ उपद्रवी पर आसानी से पैनी नजर रख जा सकेगी।
- यह जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें भी खींच सकता है।
- इससे सेना को बहुत मदद मिलेगी और देश के दुश्मनों पर निगरानी की जा सकेगी।
पीएसएलवी, इसरो का मुख्य लॉन्च व्हीकल है, जिसने चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे महत्वपूर्ण मिशन सहित 63 उड़ानें पूरी की है। 2017 में, पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
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देश का सबसे अहम डिफेंस सैटेलाइट 'अन्वेषा'
PSLV-C62 मिशन एक बहुत ही अहम अंतरिक्ष मिशन है। यह सिर्फ एक नियमित प्रक्षेपण नहीं है। 15 उपग्रहों को सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित करने वाला यह मिशन वैश्विक स्मॉल-सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती पकड़ को दिखाता है। मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे 'अन्वेषा' नाम दिया गया है। यह रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।
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'अन्वेषा' की जानें खासियत
मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे 'अन्वेषा' नाम दिया गया है। यह रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक है, जो हर पिक्सल में सैकड़ों लाइट बैंड रिकॉर्ड करती है। इससे फसल स्वास्थ्य, मिट्टी की नमी, खनिज संसाधन, शहरी विस्तार और पर्यावरणीय बदलावों की बेहद सूक्ष्म जानकारी मिल सकेगी।
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