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ISRO: प्रोपल्शन सिस्टम में आई खराबी के चलते प्रोबा-3 सोलर मिशन को इसरो ने टाला, कल शाम 4:12 बजे फिर होगा लॉन्च

Wed, 04 Dec 2024 08:32 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,श्रीहरिकोटा

सार

प्रोजेक्ट फॉर ऑनबोर्ड ऑटोनॉमी यानी प्रोबा-3 में दो उपग्रह शामिल हैं जो एक साथ जुड़े हैं। दोनों एक साथ उड़ान भरेंगे और सूर्य के बाहरी वातावरण के अध्ययन के लिए सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी पृथ्वी पर भेजेंगे।
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इसरो - फोटो : एक्स
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) के प्रोबा-3 सोलर मिशन की लॉन्चिंग को तकनीकी खराबी के चलते टाल दिया है। बुधवार की शाम 4 बजकर 8 मिनट पर प्रोबा-3 मिशन को पीएसएलवी-सी59 से लॉन्च किया जाना था।

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यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) के महानिदेशक जोसेफ एशबैकर ने कहा कि गड़बड़ी कोरोनाग्राफ सैटेलाइट के प्रणोदन प्रणाली (प्रोपल्शन सिस्टम) में हुई है। यह उपग्रह के कक्षा नियंत्रण (ऑरबिट कंट्रोल) का हिस्सा है। इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष में अभिविन्यास (ऑरबिटिंग) और दिशा बनाए रखने के लिए किया जाता है। वैज्ञानिक इसे ठीक करने में लगे हुए हैं। इसे बृहस्पितवार को भारतीय समयानुसार शाम 4:12 बजे फिर से लॉन्च किया जाएगा। इसरो ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में इस मिशन के दोबारा लॉन्च की जानकारी दी है।

1,778 करोड़ का आया है खर्च
प्रोबा-3, यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसओ) के प्रोबा सीरीज का तीसरा सोलर मिशन है। खास बात ये है कि प्रोबा सीरीज के पहले मिशन को भी इसरो ने ही 2001 में लॉन्च किया था। प्रोबा-3 मिशन के लिए स्पेन, बेल्जियम, पोलैंड, इटली और स्विट्जरलैंड की टीमों ने काम किया है। इस पर करीब 20 करोड़ यूरो (करीब 1,778 करोड़ रुपये) का खर्च आया है।
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सूर्य के कोरोना का अध्ययन करेगा प्रोबा-3

प्रोबा-3 मिशन के जरिए वैज्ञानिक सूर्य के अंदरूनी और बाहरी कोरोना के बीच बने काले घेरे का अध्ययन करेंगे। सूर्य के कोरोना का तापमान 20 लाख डिग्री फेरनहाइट तक जाता है। किसी उपकरण की मदद से इसका अध्ययन करना मुमकिन नहीं होता है। प्रोबा-3 के दो सैटेलाइट कोरोनाग्राफ (310 किग्रा) और ऑकल्टर (240 किग्रा) मिलकर सूर्यग्रहण की नकल बनाएंगे। इससे सूर्य से निकलने वाली तीव्र रोशनी को रोका जा सकेगा और ऐसा करने से सूर्य के कोरोना का अध्ययन करना भी आसान हो जाएगा। वैज्ञानिक पता लगाएंगे कि आखिर सूर्य के कोरोना का तापमान उसकी सतह से इतना अधिक क्यों होता है।

दोनों उपग्रह एक दूसरे से 150 मीटर की दूरी पर रहेंगे
44.5 मीटर लंबा रॉकेट लगभग 18 मिनट के सफर के बाद प्रोबा-3 उपग्रहों को तय कक्षा में स्थापित करेगा। प्रोबा-3 (प्रोजेक्ट फॉर ऑन बोर्ड ऑटोनोमी) में लगे दोनों उपग्रह एक साथ उड़ान भरेंगे और सूर्य के बाहरी वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए एक मिलीमीटर तक सटीक संरचना बनाए रखेंगे। दोनों उपग्रह पृथ्वी की अण्डाकार कक्षा में चक्कर लगाएंगे। पृथ्वी से इनकी सबसे ज्यादा दूसरी 60,530 किलोमीटर और सबसे कम दूसरी लगभग 600 किलो मीटर होगी। इस कक्षा में दोनों उपग्रह एक दूसरे से 150 मीटर की दूरी रखने में सक्षम होंगे और एक यूनिट की तरह काम करेंगे।

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