सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर याचिका की सुनवाई टाल दी है। मामले पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
हाई कोर्ट ने इसरो जासूसी मामले में पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज को सेशन कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी पूर्व दी गई जमानत पर लगाई गई 60 दिनों की समय सीमा को रद्द कर दिया था।
हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत की अवधि को 60 दिन तक सीमित करने की शर्त को चुनौती देने वाली मैथ्यूज की याचिका पर यह आदेश दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका शुक्रवार को सुनवाई के लिए जस्टिस ए.एम.खानविलकर और जस्टिस जेबी परदीवाला की बेंच के समक्ष आयी।
सीबीआई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी.राजू ने कहा कि इसे मामले में चार अन्य व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ जांच एजेंसी द्वारा दायर लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
बेंच ने कहा कि वह इन मामलों पर 27 जुलाई को सुनवाई करेगी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, "ऐसी परिस्थितियों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह उचित है कि 60 दिनों की उक्त समय सीमा को हटा दिया जाए।"
सीबीआई ने पहले भी सुप्रीम का रुख किया था
इससे पहले सीबीआई ने हाई कोर्ट के पिछले साल 13 अगस्त के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। मामला भी लंबित है। हाई कोर्ट ने पिछले साल 13 अगस्त को गुजरात के पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार, केरल के दो पूर्व पुलिस अधिकारियों एस विजयन और थंपी एस दुर्गा दत्त और एक सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी पीएस जयप्रकाश को मामले में अग्रिम जमानत दी थी।
श्रीकुमार उस समय इंटेलिजेंस ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर थे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में पिछले साल 13 अगस्त के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर नोटिस जारी किया था।
एक या दो दशक पीछे चला गया अंतरिक्ष कार्यक्रम : सीबीआई
सीबीआई ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने अपनी जांच में पाया है कि इस मामले में कुछ वैज्ञानिकों को प्रताड़ित किया गया और फंसाया गया जिसके कारण क्रायोजेनिक इंजन का विकास प्रभावित हुआ और इसके कारण भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगभग एक या दो दशक पीछे चला गया।
सीबीआई ने 18 लोगों के खिलाफ दर्ज किए हैं मामले
सीबीआई ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन की गिरफ्तारी और हिरासत के संबंध में आपराधिक साजिश सहित विभिन्न कथित अपराधों के लिए 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए हैं।
1994 में सुर्खियों में आया यह मामला भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर कुछ गोपनीय दस्तावेजों को विदेशों में स्थानांतरित करने के आरोपों से संबंधित है। नंबी नारायणन को सीबीआई द्वारा क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने पहले कहा था कि केरल पुलिस ने मामले को 'गढ़ा' था और 1994 के मामले में जिस तकनीक को चुराने और बेचने का आरोप लगाया गया था, वह उस समय भी मौजूद नहीं थी।
सीबीआई ने अपनी जांच में कहा था कि नारायणन की अवैध गिरफ्तारी के लिए केरल के तत्कालीन शीर्ष पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे। सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर, 2018 को तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की थी, जबकि केरल सरकार को नारायणन को "बेहद अपमान" के लिए मजबूर करने के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।