ISRO: भारत अपने नए संचार उपग्रह जीसैट-एन2 को लॉन्च करने के लिए अरपति कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पर निर्भर था, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पास 4,000 किलोग्राम से अधिक वजन के उपग्रह को लॉन्च करने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं थी।
भारत अपने नए संचार उपग्रह जीसैट-एन2 को लॉन्च करने के लिए अरपति कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पर निर्भर था, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पास 4,000 किलोग्राम से अधिक वजन के उपग्रह को लॉन्च करने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं थी। इसरो के पूर्व प्रमुखों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
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जीसैट-एन2 उपग्रह का वजन 4,700 किलोग्राम था, जिसको अमेरिका में स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा गया। यह एक प्रकार का संचार उपग्रह है, जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में ब्रॉडबैंड सेवाएं और हवाई यात्रा के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष के सिवन ने पीटीआई के साथ बातचीत में बताया कि यह उपग्रह इसरो के लॉन्च वाहनों की क्षमता से अधिक भारी था, इसलिए इसे बाहर भेजा गया। उन्होंने बताया कि इसरो के पास चार टन तक वजन उठाने की क्षमता है, जबकि जीसैट-एन2 का वजन 4.7 टन था। सिवन ने बताया कि इसरो की क्षमता बढ़ाने के लिए योजनाएं बन रही हैं और इस पर काम चल रहा है।
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वहीं, इसको लेकर इसरो के पूर्व प्रमुख जी. माधवन नायर ने कहा, भारत को इस बड़े 4.7 टन के उपग्रह को लॉन्च करने के लिए ज्यादा लॉन्च क्षमता की आवश्यकता थी, जो यहां मौजूद नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि इसरो अगली पीढ़ी के रॉकेट की क्षमता को दोगुना करने की योजना बना रहा है। लेकिन तब तक इंतजार करना संभव नहीं था। इसलिए स्पेसएक्स को चुना गया। इसरो की व्यावसायिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने जीसैट-एन2 उपग्रह के लॉन्च को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।