अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ा कदम रखते हुए भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह बात इसरो प्रमुख के सिवन ने गुरुवार को कही। यह महत्वाकांक्षी परियोजना गगनयान मिशन का विस्तार होगी। नई दिल्ली में मौजूद सिवन ने कहा कि हमें मानव अंतिरक्ष मिशन को लॉन्च करने के बाद गगनयान प्रोग्राम का विस्तार करना होगा। इसीलिए, भारत अपना स्पेस सेंटर लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
इससे पहले 12 जून को बंगलूरू में इसरो प्रमुख ने कहा था कि चंद्रमा की सतह पर खनिजों के अध्ययन और प्रयोग करने के लिए भारत के दूसरे अभियान 'चंद्रयान-2' 15 जुलाई को रवाना होगा। उन्होंने बताया था कि यह यान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा। चंद्रमा के इस हिस्से के बारे में वैज्ञानिकों के पास ज्यादा जानकारी नहीं है।
बता दें कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को रात 2:51 बजे श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इसे जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट अंतरिक्ष में ले जाएगा। इस अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान 3.8 टन है। इसमें तीन मॉड्यूल आर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं।
अभी सिर्फ दो स्पेस स्टेशन हैं
डॉक्टर के. सिवन ने कहा कि भारत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) का हिस्सा नहीं बनेगा। अभी सिर्फ दो स्पेस स्टेशन हैं। एक स्टेशन (आईएसएस) यूरोपियन देश, अमेरिका, रूस, जापान और कनाडा ने संयुक्त रूप से बनाया है। दूसरा चीन का है। अगर भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने में सफल रहता है तो तीसरा हमारा होगा। इससे पहले सोवियत यूनियन और अमेरिका ने स्पेस स्टेशन स्थापित किए थे, जो अब नहीं हैं।
पहला: सौर मिशन, जो 2020 में होगा
इसरो का सौर मिशन आदित्य एल-1 अगले साल पहली छमाही में जाएगा। यह सूरज के कोरोना में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करेगा। मौसम पर सबसे ज्यादा प्रभाव कोरोना में होने वाले बदलाव ही डालते हैं। सौर मिशन पृथ्वी और सूरज के बीच पहले लग्रांजियन बिंदु (एल1) तक जाएगा। यह 15 लाख किलोमीटर दूर है। वहां पहुंचने में 109 दिन लगेंगे।
75वें स्वतंत्रता दिवस पर पहला मानव मिशन भेजेगा इसरो: स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर इसरो अपना पहला मानव मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा। अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह 2022 से पहले भी हो सकता है। इसकी निगरानी के लिए विशेष राष्ट्रीय सलाहकार परिषद बनाई गई है।
दूसरा: शुक्र मिशन, जो 2-3 साल में होगा
डॉ. सिवन ने बताया कि इसरो 2-3 साल में शुक्र पर भी एक मिशन भेजेगा। अंतरिक्ष कार्यक्रम का पहला उद्देश्य वंचितों तक सुविधाएं और आधुनिक प्रौद्योगिकी को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना है। दूसरा उद्देश्य सौर मंडल के रहस्य उजागर करना है। इसरो अब दूसरे उद्देश्यों की ओर बढ़ रहा है। चंद्रयान, गगनयान, मंगलयान और अंतरिक्ष केंद्र इसी के हिस्से हैं।