अंतरिक्ष के इतिहास में भारत को नई कामयाबियों पर पहुंचाने वाले इसरो के प्रमुख के सिवन ने देश को जश्न मनाने के कई मौके दिए हैं। भारत के मून मिशन चंद्रयान-2 के सूत्रधार के तौर पर वह हमेशा याद किए जाएंगे। लगभग 95 फीसदी सफल होने वाले इस चंद्र मिशन में भले ही संपर्क टूट जाने से इसरो लैंडर विक्रम की सफल लैंडिंग कराने में नाकाम रहा हो, लेकिन ऑर्बिटर के एकदम सही काम करने से इसकी महत्ता और सिवन की मेहनत व्यर्थ होने वाली नहीं है। ऑर्बिटर द्वारा भेजी थर्मल तस्वीरों से पता चला है कि लैंडर एकदम सही है। इसरो लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है।
इसरो प्रमुख का पूरा नाम डॉ. कैलाशवडिवू सिवन (K Sivan) है। 14 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के सराक्कलविलाई गांव में एक किसान के घर उनका जन्म हुआ था। सिवन ने एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से पढ़ाई की है। नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया। सिवन स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। उनके भाई और बहन गरीबी के कारण अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। लेकिन सिवन का सफर यहीं नहीं रुका। 1980 में उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (IISc) से इंजीनियरिंग में पीजी की पढ़ाई की। फिर 2006 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।
साल 2018 में सिवन को इसरो का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उनसे पहले इस पद पर ए. एस. किरण कुमार थे। के. सिवन के अनुसार, जब वह कॉलेज में थे तो खेतों में अपने पिता की मदद भी करते थे। इस कारण स्नातक में उनका दाखिला घर के पास के कॉलेज में ही करा दिया गया था। लेकिन जब उन्हें बीएससी में मैथ्स में 100 फीसदी अंक मिले, तो उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान देने का मन बना लिया।