इस्राइल ने गाजा पट्टी में पिछले कुछ दिनों के दौरान फलस्तीनी चरमपंथी समूह हमास के सैन्य एवं खुफिया ढांचे और भूमिगत सुरंगों समेत सैंकड़ों लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर उसे तगड़ी चोट पहुंचाई है। इस्राइल की एक शीर्ष राजनयिक ने शुक्रवार को यह बात कही।
इस्राइली दूतावास की उप प्रमुख रॉनी येदीदिया क्लीन ने कहा कि इस्राइली कार्रवाई को अमेरिका और कई अन्य देशों का भरपूर समर्थन मिला जबकि भारत को इसको लेकर एक समझ थी। उन्होंने कहा, हमने अपने भारतीय समकक्षों से बात की। हमने पाया है कि उन्होंने हमारी स्थिति को समझा है लेकिन अन्य कई देशों की तरह सार्वजनिक रूप से समर्थन व्यक्त नहीं किया।
इस्राइल और हमास दोनों 11 दिन तक चली लड़ाई के बाद शुक्रवार को संघर्ष विराम लागू करने पर सहमत हो गए। इस लड़ाई में गाजा में करीब 230 लोगों की और इस्राइल में 12 लोगों की मौत हुई। क्लेन ने कहा कि जमीनी हकीकत से तय होगा कि संघर्ष विराम टिक पाएगा या नहीं।
क्लेन ने पत्रकारों से कहा, हमने गाजा में उग्रवादी संगठन हमास को तगड़ी चोट पहुंचाई। हमने हमास के सैंकड़ों सैन्य और खुफिया ढांचों को निशाना बनाया। क्लीन ने 11 मई को गाजा से रॉकेट हमले में भारतीय नागरिक सौम्या संतोष की मृत्यु होने का भी जिक्र किया। संतोष केरल के इडुक्की जिले की रहने वाली थी।
उन्होंने कहा कि इस्राइली लोग सौम्या को अपनों में से एक मानते थे और सौम्या के परिवार को इजराइल के राष्ट्रीय बीमा संस्थान से मुआवजा मिलेगा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में रेखांकित किया कि इस्राइल और फलस्तीन के बीच वार्ता बहाल करने में सहायक माहौल तैयार करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
पश्चिम एशिया और फलस्तीन की स्थिति पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की बुलाई गई बैठक में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने कहा, हम इस बात पर जोर दते हैं कि ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए जिससे तनाव बढ़े, साथ ही एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की किसी भी कोशिश से भी बचना चाहिए।