पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने ईरान पर अमेरिका और इस्राइल की तरफ से किए गए हालिया सैन्य हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत 'अवैध आक्रमण' करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध इस्राइल ने खुद शुरू किया और अमेरिका की मदद से इसे अंजाम दिया। पिछले दो हफ्तों से ईरान और इस्राइल के बीच सैन्य टकराव जारी है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के शहरों और रणनीतिक ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। तनाव उस समय और बढ़ गया जब रविवार सुबह अमेरिका ने ईरान के तीन बड़े परमाणु स्थलों पर बमबारी की।
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'युद्ध की जड़ इस्राइल की मौजूदा सरकार की सोच है'
एक समाचार एजेंसी को दिए गए एक इंटरव्यू में हामिद अंसारी ने कहा, 'इस युद्ध की जड़ इस्राइल की मौजूदा सरकार की सोच है। वे बार-बार कह चुके हैं कि ईरान की सरकार को बदलना चाहिए। यानी यह एक सोची-समझी योजना के तहत किया गया हमला था।' उन्होंने आगे कहा कि इस हमले में अमेरिका की भी अहम भूमिका रही, 'यह हमला अमेरिका के सहयोग से किया गया। यह एक 'अवैध आक्रमण' है, और अंतरराष्ट्रीय कानून में इसे ऐसा ही माना जाना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती।'
ईरान की स्थिति का बचाव
हामिद अंसारी ने ईरान की सरकार को स्थिर और जनता का समर्थन प्राप्त बताते हुए कहा कि ईरान का विज्ञान और तकनीक में विकास हुआ है, और उसे परमाणु तकनीक विकसित करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, 'कोई देश यह नहीं कह रहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ा है। उन पर आरोप और संदेह हैं, लेकिन कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने परमाणु बम बना लिया है।'
ट्रंप और अमेरिका की भूमिका
जब उनसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, इसलिए उनसे संवाद करना पड़ेगा। उनका काम करने का तरीका अलग है, लेकिन दुनिया अब उनके तौर-तरीकों को समझने लगी है।'
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'भारत को संतुलित नीति अपनानी चाहिए'
हामिद अंसारी ने भारत को अमेरिका से दोस्ती बनाए रखने की सलाह दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इससे ईरान जैसे पुराने सहयोगी देशों से रिश्ते नहीं बिगड़ने चाहिए। 'भारत और ईरान के रिश्ते बहुत पुराने और मजबूत हैं। जब ज़रूरत पड़ी है, ईरान ने हमारी मदद की है और हमने भी उनकी। ऐसे रिश्ते छोटी-छोटी बातों पर नहीं टूटने चाहिए।'
गाजा मुद्दे पर भारत की चुप्पी पर सवाल उठाया
पूर्व उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि, 'गाजा में पूरी दुनिया कह रही है कि नरसंहार हो रहा है, लेकिन हम चुप हैं। नरसंहार, नरसंहार होता है – चाहे वह दक्षिण अफ्रीका में हो या कहीं और।'