इजरायल का चंद्रमा मिशन बेर्सेट शुक्रवार को चांद की सतह पर दुर्घटना का शिकार हो गया। जिससे भारत एक बार फिर रूस, अमेरिका और चीन के बाद चंद्रमा पर पहुंचने के लिए दुनिया का चौथा देश बनने की रेस में आ गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल जनवरी में इजरायल से लगभग हार मान ली थी जब उसने एक ऑर्बिटर, लैंडर और एक रोवर वाले अपने चंद्रयान -2 मिशन को अप्रैल तक के लिए टाल दिया था। बाद में 800 करोड़ रुपये की लागत वाला दूसरा चंद्रमा मिशन एक महीने के लिए फिर से विलंबित हो गया और अब मई लॉन्च के लिए निर्धारित है।
इजरायल के मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की तस्वीरें लेना और वहां प्रयोग करना था। इजरायल चांद पर पहुंच कर ऐसा करने वाला चौथा देश बनने की उम्मीद में था।
परियोजना के प्रवर्तक और प्रमुख बैकर मॉरिस कहन ने कहा, "हम सफल नहीं हो पाए, लेकिन निश्चित तौर पर हमने कोशिश की।"
प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस पूरे मिशन को तेल अवीव के पास नियंत्रण कक्ष से देख रहे थे। उन्होंने कहा, "अगर पहली बार में आप सफल नहीं होते हैं, तो आप फिर से कोशिश करते हैं।"
भारतीय मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो पहली बार अपने यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की कोशिश करेगा। भारत के चंद्रयान-1 अभियान ने ही पहली बार चांद पर पानी की खोज की थी। चंद्रयान-2 इसी अभियान का विस्तार है।
चांद पर भारत की दूसरी यात्रा
यह भारत की दूसरी चांद यात्रा है। भारत के मून रोवर की पहली तस्वीर इसरो के 800 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट चंद्रयान- 2 मिशन का हिस्सा ही है। कहा जा रहा है कि चंद्रयान-2 मिशन के जरिए भारत दक्षिण ध्रुव के करीब सॉफ्ट लैंडिंग कर, छह पहियों वाले रोवर को स्थापित करने की तैयारी में है, ताकि चांद की सतह से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की जा सकें। अपने इस मून मिशन के लिए भारत अपने सबसे भारी रॉकेट बाहुबली का इस्तेमाल कर रहा है।
चंद्रयान-2 यान का वजन 3,290 किलो है और यह चंद्रमा के चारों ओर चक्कर काटेगा और उसका अध्ययन करेगा। यान के पेलोड चांद की सतह से वैज्ञानिक सूचनाएं और नमूने एकत्र करेंगे। यह पेलोड चांद के खनिज, तत्वों की संरचना, चांद के वातावरण और वाटर आइस का भी अध्ययन करेगा। इसरो ने अपना पहला चंद्र अभियान चंद्रयान-1 वर्ष 2008 में लांच किया था।
चंद्रयान-2 ऐसे रचेगा इतिहास
- चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने के बाद, लैंडर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा।
- चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंडिंग करेगा।
- लैंडर के अंदर लगे 6-पहिए वाले रोवर अलग हो जाएंगे और चंद्रमा की सतह पर आगे बढ़ेंगे।
- यह चंद्रमा की सतह पर 14 दिन तक रह पाएगा।
- चंद्रयान-2 150-200 किमी तक चलने में सक्षम होगा।
- रोवर 15 मिनट के भीतर चंद्रमा की सतह के आंकड़े और छवियों को पृथ्वी पर भेज देगा।
- 14 दिनों के बाद रोवर स्लीप मोड में जाएगा।