भारत पूरे पश्चिम एशिया में चावल, फल-सब्जी, कपड़ों, हैंडबैग, फार्मास्युटिकल वस्तुओं और फुटवियर का बड़ा निर्यातक है। यदि ईरान से भारत का यह व्यापार गड़बड़ होता है तो इससे भारत को बड़ा झटका लग सकता है।
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापार रोकने पर विचार कर रहा है। इससे भारत के तेल-गैस के आयात पर गहरा असर पड़ सकता है। होर्मुज से दुनिया के तेल व्यापार का 20 प्रतिशत का व्यापार होता है। भारत के तेल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत और गैस आयात का आधे से कुछ अधिक व्यापार इसी मार्ग से होता है। ऐसे में यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को रोकने का निर्णय कर लिया तो इससे पूरी दुनिया के व्यापार पर असर पड़ेगा और इसका असर महंगाई बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।
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भारत पूरे पश्चिम एशिया में चावल, फल-सब्जी, कपड़ों, हैंडबैग, फार्मास्युटिकल वस्तुओं और फुटवियर का बड़ा निर्यातक है। पश्चिम एशिया के देशों में वह अनेक देशों को इन वस्तुओं का निर्यात करता है। यदि ईरान से भारत का यह व्यापार गड़बड़ होता है तो इससे भारत को बड़ा झटका लग सकता है। हरियाणा, प. बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से भारत इन देशों को चावल का निर्यात करता है। लेकिन ईरान-इस्राइल का युद्ध गहराने से यह व्यापार प्रभावित हो रहा है।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापार भारत को कई तरीके से प्रभावित कर सकता है। सीधे तौर पर ईरान-इस्राइल युद्ध की कीमत भारतीय उपभोक्ताओं को भी चुकानी पड़ेगी। तेल के महंगे होने से अंतर्देशीय परिवहन कीमतों में भी तेज वृद्धि होगी। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। इससे इस समय महंगाई के मोर्चे पर भारत को मिली बडी़ राहत बेअसर हो सकती है और लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।
चूंकि भारत दुनिया के 40 देशों से तेल-गैस का आयात करता है, और ईरान से सीधे उसकी तेल-गैस का व्यापार बहुत सीमित है, इससे भारत की कुल तेल जरूरतों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, लेकिन मार्ग बदलने से तेल के आयात का खर्च बढ़ेगा जिससे देश में पेट्रोलियम उत्पादों के महंगे होने की संभावना है।