युद्धविराम के कारण हमास को मिल सकती है ऊर्जा
एक पूर्व विदेश सचिव का भी कहना है कि उन्हें अंदेशा है कि संघर्ष विराम के बाद हमास मजबूत होगा। उसे अब कुछ और इस्राइल विरोधी देशों का समर्थन मिल सकता है। हमास को अभी तक इस्राइल आतंकी संगठन कहता था, दुनिया के कुछ देश उसे उग्रवादी संगठन कहते हैं। लेकिन अब उसे फिलिस्तीनियों की बड़े पैमाने पर सहानुभूति मिल सकती है। ऐसा होने पर वह गाजा समेत फिलीस्तीन के अन्य क्षेत्र में लोकप्रियता बढ़ा सकता है। इसके समानांतर फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासिर अराफात के निधन के बाद पीएलओ की तकत कमजोर हुई है। हमास को उभरने में मदद मिली। वह बताते हैं कि इस्राइल में हमास के समर्थक तो अब जश्न मना रहे हैं।
भविष्य में फिर भड़क सकती है हिंसा
इस्राइल और फिलिस्तीन में आने वाले समय में फिर हिंसा भड़कने की पूरी संभावना है। विदेश सेवा के अधिकारियों का कहना है कि यह तो अंतरराष्ट्रीय दबाव में केवल संघर्ष विराम हुआ है। दोनों देशों के बीच में टकराव के मुद्दे का समाधान नहीं हुआ है। बताते हैं यह समाधान बहुत आसान नहीं है। इस्राइल ने अमेरिका समेत अपने कुछ सहयोगी देशों के साथ पूरा दबदबा बना रखा है। कूटनीतिक मोर्चे पर भी इस्राइल काफी मजबूत है। जबकि कभी यही मजबूती फिलिस्तीन के नेता यासर अराफात के पास होती थी। बताते हैं अराफात के बाद से फिलिस्तीन मुक्ति संगठन कभी भी वह समर्थन नहीं जुटा सका। अब धीरे-धीरे हमास अपनी ताकत बढ़ा रहा है। हमास कट्टरपंथी संगठन है और भविष्य में फिर संघर्ष छिड़ने की पूरी संभावना मौजूद है।
22 मई को होना था फिलिस्तीन नेशनल प्राधिकरण का चुनाव
फिलिस्तीन नेशनल प्राधिकरण का चुनाव 22 मई को होना था। 31 जुलाई को नए राष्ट्रपति चुन लिए जाते। इसके समानांतर फिलिस्तीन मुक्ति संगठन की नेशनल काउंसिल का चुनाव 31 अगस्त को होना था। लेकिन चुनाव की प्रक्रिया बाधित कराने, टालने की स्थिति पैदा करने में इस्राइल का बड़ा हाथ रहा। इस चुनाव से हमास को काफी उम्मीदें थीं। हालांकि माना जा रहा है कि निकट भविष्य में होने वाले चुनाव में हमास फिलिस्तीन में अपनी मजबूत पकड़ बना सकता है।
क्या है फिलिस्तीन की स्थिति
फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र संघ में एक गैर-सदस्य ऑब्जर्वर स्टेट का दर्जा पा चुका क्षेत्र है। इसके नेता संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होते हैं। यह इस्राइल से अपनी स्वतंत्रता और स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता के लिए संघर्ष कर रहा है। 2011 में फिलिस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में पूर्ण सदस्यता पाने के लिए प्रयास किया था। फिलिस्तीन का दावा वेस्टर्न बैंक और गाजा पर है। वह यरुशलम को अपनी भविष्य की राजधानी मानता है और फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी (पीएनए) रामाल्लाह से अपनी कार्यप्रणाली को संचालित करती है। 23 नवंबर से फिलिस्तीन यूनेस्को का सदस्य है। 2012 में फिलिस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र में गैर-सदस्यीय देश का दर्जा पाने का भी प्रयास किया था। 138 अंतरराष्ट्रीय सदस्यों के समर्थन के बाद भी वह इसे हासिल नहीं कर सका।