भारत में इस्राइली राजदूत रुवेन अजार
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भारत में इस्राइल के राजदूत रुवेन अजार का कहना है कि ईरान ने इस्राइल के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा था। ईरान ने परमाणु हथियार बनाना जारी रखा। ऐसे में इस्राइल को हमला करना पड़ा। इस्राइली राजदूत ने कहा कि 'ईरान को इतिहास से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन ने परमाणु हथियार जुटाने की कोशिश की, बशर अल असद सरकार ने भी ऐसा करने की कोशिश की। गद्दाफी ने भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की, लेकिन सभी का नतीजा एक ही रहा।'
इस्राइली राजदूत ने बताया- क्यों किया ईरान पर हमला
इस्राइली राजदूत ने मीडिया चैनल एनडीटीवी के साथ बातचीत में बताया कि 'ईरान की कट्टरपंथी सरकार परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बार-बार कहा है कि वे इस्राइल को तबाह करना चाहते हैं। वे कथित ट्यूमर को हटाना चाहते हैं और छोटे शैतान इस्राइल को खत्म कर बड़े शैदान अमेरिका से लड़ना चाहते हैं। सबसे अहम बात आप ऐसे हथियार बनाना चाहते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों को मारा जा सके तो फिर इसका विरोध होगा ही।'
इस्राइल के ईरान पर हमले की वजह बताते हुए रुवेन अजार ने कहा कि 'ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के जरिए ईरान में परमाणु ठिकानों के साथ ही 200 से ज्यादा जगहों को निशाना बनाया गया। इनमें सैन्य ठिकाने भी शामिल हैं। ईरान दुनिया को बेवकूफ बना रहा था और परमाणु हथियार बनाने के लिए चुपचाप यूरेनियम संवर्धन कर रहा था। तेहरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था, ऐसे में इस्राइल और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता था।'
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इस्राइल का दावा- ईरान की तीन सूत्रीय योजना तबाह की
इस्राइली राजदूत ने बताया कि ईरान ने इस्राइल के अस्तित्व को खत्म करने के लिए तीन सूत्रीय योजना बनाई हुई है। पहली योजना के तहत ईरान परमाणु हथियार पाना चाहता है, लेकिन हमने उसकी इस योजना को रोक दिया है। दूसरी योजना बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन करना है। ईरान के हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। ईरान अगले तीन वर्षों में 10 हजार बैलिस्टिक मिसाइलें बनाना चाहता है और अगले छह वर्षों में उसकी योजना 20 हजार बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की है।
अजार ने कहा कि एक बैलिस्टिक मिसाइल में एक हजार किलो टीएनटी होता है, जो बड़ी संख्या में लोगों की जान ले सकती है। ईरान द्वारा अगर बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया जाता है तो यह इस्राइल जैसे छोटे देश के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है। ईरान की तीसरी योजना प्रोक्सी लड़ाई है, जिसके तहत ईरान हमास, हिजबुल्ला जैसे संगठनों को हथियार और आर्थिक मदद मुहैया करता है। गौरतलब है कि इस्राइल हमास और हिजबुल्ला को पहले ही भारी नुकसान पहुंचा चुका है। यही वजह है कि ईरान के साथ संघर्ष में गाजा या लेबनान की तरफ से हमले की आशंका कम ही है।
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