India-Israel relations- Israel ambassador to India Naor Gilon
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इस्राइल का दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक जहाजों वाला बंदरगाह हाइफा को अदाणी ग्रुप ने अधिग्रहित कर लिया। इसे लेकर भारत में इस्राइल के राजदूत निओर गिलन कहते हैं कि यह दो देशों के बीच मजबूत भरोसा ही है, सिर्फ अदाणी ही नहीं बल्कि भारत के 80 से ज्यादा कंपनियों के साथ इस्राइल के व्यापारिक समझौते हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत हो रहे रिश्ते इस बात के गवाह हैं कि भारत और इस्राइल न सिर्फ दोनों देशों के विकास के लिए अच्छे साझेदार हैं, बल्कि एक अच्छे दोस्त के तौर पर भी कदम से कदम मिला रहे हैं। निओर गिलान बुधवार को भारत और इस्राइल के डिप्लोमेटिक रिश्तों के तीस साल पूरे होने पर मीडिया से मुखातिब थे। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी पर चर्चा की।
अदाणी समूह को कई और प्रोजेक्ट्स में भी भागीदारी
भारत में इस्राइल के राजदूत निओर गिलन ने अमर उजाला डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि हाइफा बंदरगाह को अदाणी की ओर से अधिग्रहित किए जाने को इस्राइल, भारत और इस्राइल के बीच एक मजबूत भरोसे के तौर पर देखता है। वह कहते हैं कि अदाणी ग्रुप के पास बंदरगाह चलाने की क्षमता भी है, और वह इस व्यापार में भी हैं। राजदूत कहते हैं कि उनका यह बंदरगाह व्यापारिक नजरिए और दृष्टिकोण से इस पूरे क्षेत्र का बड़ा ट्रेड सेंटर है। वह कहते हैं कि अदाणी ग्रुप इस्राइल के कई स्ट्रेटिजिक प्रोजेक्ट में देखभाल करने और भागीदारी की तैयारी में है। उनका कहना हैं कि सिर्फ अदाणी ही नहीं बल्कि देश के और भी कई बड़े व्यापारिक समूह और कंपनियां इस्राइल में अपने व्यवसाय को दोनों देशों के बीच बेहतर माहौल और साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं। इस्राइल में टाटा समेत करीब 80 से ज्यादा कंपनियों और व्यापारिक उद्यमियों की भागीदारी बनी हुई है।
इस दौरान भारत में इस्राइल के राजदूत ने दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे व्यापारिक समझौतों के साथ-साथ दोस्ती को आगे मजबूत रिश्तों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। वह कहते हैं कि इस तरह के व्यापारिक समझौते से दोनों देशों को न सिर्फ फायदा होगा, बल्कि व्यापारिक निवेश को बढ़ावा भी मिलेगा। भारत और इस्राइल के डिप्लोमेटिक रिश्तों के तीस साल पूरे होने पर राजदूत गिलन कहते हैं कि जल्द ही इस्राइल के विदेश मंत्री भारत दौरे पर आने वाले हैं। वह कहते हैं कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत कब आएंगे इसकी तारीख तो नहीं तय है। लेकिन इस दिशा में काम किया जा रहा है।
ईरान का यूरेनियम भंडार चिंता का विषय
वह कहते हैं कि इन तीन दशकों में भारत और इस्राइल न सिर्फ आपस में बेहद करीब आए हैं, बल्कि रिश्तों में गर्माहट भी लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच आपसी सूझबूझ से ही लोगों के फायदे के लिए तमाम बेहतर कदम उठाए गए हैं और आगे भी उठाए जा रहे हैं। राजदूत ने कहा कि भारत से व्यापारिक समझौतों में ही नहीं, बल्कि संस्कृति के आदान-प्रदान की दिशा में भी कई कदम आगे बढ़ चुके हैं। वह कहते हैं कि हाल में ही अभी कल्चरल एक्टिविटी के माध्यम से न सिर्फ इस्राइल की संस्कृतिक धरोहर को भारत के साथ साझा किया गया, बल्कि भारत की तमाम एतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दोनों देशों के बीच न सिर्फ साझा किया जा रहा है बल्कि उसको आगे भी बढ़ाया जा रहा है।
इस दौरान इस्राइल के राजदूत ने ईरान में यूरेनियम के भंडारण पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा एक तय मात्रा से ज्यादा यूरेनियम के भंडार होने का मतलब स्पष्ट हो जाता है कि उसका मकसद क्या है। उन्होंने अपने पड़ोसी मुल्क ईरान का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान में यूरेनियम के भंडार पूरी दुनिया के लिए बड़े खतरनाक संकेत हैं। अपने देश की व्यापारिक नीतियों खासतौर से डिफेंस के मामले में होने वाली व्यापारिक डील पर भी खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि उनके देश की जीडीपी का सात से आठ फ़ीसदी बजट सिर्फ डिफेंस के लिए ही होता है। इसके पीछे का कारण बताते हुए उनका कहना है कि जिन परिस्थितियों के बीच में वह रह रहे हैं उसके लिए यह जरूरी भी है। उन्होंने कहा कि भारत इस्राइल का एक भरोसेमंद भागीदार और दोस्त भी है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए मेक इन इंडिया कार्यक्रम से इस्राइल की डिफेंस कंपनियों के लिए एक बड़ा चैलेंज जरूर रहा। लेकिन भारत के भरोसेमंद भागीदारी और सच्चे दोस्त होने के चलते उस दिशा में आगे बहुत बेहतर काम भी कर रहे हैं।