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ऑपरेशन सिंदूर के बाद ISI का नया खेल: लश्कर-इस्लामिक स्टेट को साथ लाने में जुटी, भारत के खिलाफ बना रही गठजोड़

Wed, 08 Oct 2025 06:06 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

आईएसआई की मंशा है कि इस गठजोड़ का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद भड़काने में किया जाए। साथ ही यह गठजोड़ बलोच विद्रोहियों और तालिबान के उस धड़े से भी निपटे जो पाकिस्तान के कहने में नहीं है। इससे पहले लश्कर और जैश के ठिकाने योजनाबद्ध तरीके से पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से हटाकर अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वाह में शिफ्ट किए गए थे।
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आतंकी घटना करने की साजिश। डमी पिक - फोटो : डमी पिक
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विस्तार
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ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद पाकिस्तान अब भारत के खिलाफ नए हाइब्रिड वॉरफेयर मॉडल पर काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) को साथ लाने में जुट गई है।

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आईएसआई की मंशा है कि इस गठजोड़ का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद भड़काने में किया जाए। साथ ही यह गठजोड़ बलोच विद्रोहियों और तालिबान के उस धड़े से भी निपटे जो पाकिस्तान के कहने में नहीं है। इससे पहले लश्कर और जैश के ठिकाने योजनाबद्ध तरीके से पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से हटाकर अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वाह में शिफ्ट किए गए थे। हाल ही में सामने आई एक तस्वीर में बलूचिस्तान में आईएसकेपी का आतंकवादी मीर शफीक मेंगल, लश्कर कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक को एक पिस्तौल देता दिख रहा है।

अशफाक का काम लश्कर का नया मरकज बनाना और दूसरे आतंकी संगठनों के साथ तालमेल स्थापित करना है। जबकि मेंगल बलोच विद्रोहियों को निशाना बनाने वाले आत्मघाती दस्ते की कमान संभाल रहा है। आईएसआई की वित्तीय मदद से आईएसकेपी ने बलूचिस्तान के मस्तुंग और खुजदार जिलों में दो मुख्य अड्डे बनाए हैं। इन अड्डों का मुखिया मेंगल है, जिसके आत्मघाती दस्ते ने आईएसआई के निर्देश पर साल 2010 से ही बलोच विद्रोहियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। 2023 में उसकी एक तस्वीर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ भी सामने आई थी।
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हालिया घटनाएं और उभरता खतरा
मार्च 2025 में बलोच लड़ाकों ने आईएसकेपी के मस्तुंग ठिकाने पर बड़े पैमाने पर हमला किया, जिसमें लगभग 30 आतंकवादी मारे गए। आईएसआई ने बलोच लड़ाकों से निपटने के लिए लश्कर को जवाबी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस साल जून में लश्कर प्रमुख राणा मोहम्मद अशफाक बलूचिस्तान पहुंचा। इसके बाद लश्कर के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने बलोच अलगाववादियों के खिलाफ जिहाद का आह्वान किया।

 कश्मीर पर नापाक नजर
सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई आईएसकेपी की क्षमताएं बढ़ाने के लिए लश्कर के लॉजिस्टिक नेटवर्क का उपयोग कर रही है। आईएसआई इसके जरिये कश्मीर में कमजोर होते आतंकवाद में प्राण फूंकना चाहती है। आईएसकेपी की पत्रिका यलगार के ताजा अंक में जम्मू कश्मीर में नए सिरे से आतंकी गतिविधियां बढ़ाने की पाकिस्तान की मंशा झलकती है।

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