वक्फ संशोधन बिल के विरोध में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने दिल्ली से लेकर पटना तक विरोध प्रदर्शन किया था। माना जा रहा है कि सरकार आगामी दो अप्रैल को वक्फ बिल संसद में पेश कर सकती है। इसके बीच मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इससे निपटने की अपनी तैयारी मजबूत कर ली है। वह इसका और मजबूत तरीके से विरोध करने की तैयारी कर रही है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सर्वोच्च न्यायालय जाने सहित सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।
वहीं, केंद्र सरकार को आशंका है कि जिस तरह सीएए - एनआरसी और तीन तलाक के मामले में मुसलमानों को 'गुमराह' किया गया था, उसी तरह वक्फ बिल के मामले में भी उन्हें गुमराह किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपील की है कि लोग (मुसलमान) दूसरों के बहकावे में न आएं, वक्फ संशोधन बिल को ध्यान से पढ़कर इसकी बातों को समझकर इस पर अपनी राय रखें। लोकतंत्र में लोग अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन किसी को अफवाह नहीं फैलाना चाहिए। वक्फ संशोधन कमेटी के चेयरमैन जगदंबिका पाल ने कहा है कि कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी वक्फ बिल का स्वागत किया है। इससे भाजपा का दावा है कि वक्फ बिल को लेकर सरकार की मंशा साफ है।
हर विकल्प आजमाएंगे- AIMPLB
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रमुख सदस्य कमाल फारूकी ने अमर उजाला से कहा कि वे इस बात के लिए आश्वस्त हैं कि सरकार ने वक्फ बिल सदन में लाने की पूरी तैयारी कर ली है। लेकिन उनका विरोध केवल जंतर-मंतर और पटना में विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि बिल का स्वरूप सामने आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में लड़ाई लड़ने के साथ-साथ वे हर उस विकल्प को आजमाएंगे जो इस देश के लोकतंत्र में उन्हें हासिल है।
मुसलमानों के अधिकारों में हस्तक्षेप मानता है पर्सनल लॉ बोर्ड
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि वक्फ संशोधन विधेयक के आने से मुसलमानों के अधिकारों पर हस्तक्षेप होगा। उसका यह भी मानना है कि यह मुसलमानों का आंतरिक मामला है जिसमें सरकार को दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन कई उदाहरणों के आधार पर भाजपा और अन्य हिंदूवादी नेता यह दावा करते हैं कि वक्फ बोर्ड के नियमों का गलत उपयोग कर कुछ लोग वक्फ की संपत्तियों का गलत लाभ उठा रहे हैं। वक्फ संशोधन बिल में वक्फ की संपत्तियों का दुरुपयोग रोककर इसका उपयोग गरीब मुसलमानों को मजबूत करने में किया जाएगा।
आरोप यह भी है कि वक्फ नियमों की आड़ में वक्फ बोर्ड में बैठे अधिकारी गलत तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति की जमीन को हड़प लेते हैं। यूपी-दिल्ली से लेकर तमिलनाडु तक इस तरह के कई मामले सामने आने का दावा किया गया है। सरकार का दावा है कि वक्फ की संपत्तियों का डिजिटलीकरण होने से वक्फ द्वारा गलत तरीके से संपत्तियों पर कब्जा करने के मामले भी रुकेंगे।
मुसलमानों को भड़काने में जुटा पर्सनल लॉ बोर्ड- भाजपा
भाजपा नेता अब्दुल रहमान ने अमर उजाला से कहा कि विपक्ष और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कुछ सदस्य जानबूझकर मुसलमानों को वक्फ बिल के नाम पर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस-राजद के कई नेता स्वयं वक्फ की करोड़ों की जमीनों पर कब्जा करके बैठे हैं, ऐसे में उन्हें लगता है कि यदि वक्फ संशोधन बिल पास हो जाएगा तो उन्हें यह जमीन वापस करनी पड़ सकती है। यही कारण है कि अपने निजी कारणों से वे लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की करोड़ों रुपये की संपत्तियों को, जिनका मासिक किराया भी लाखों रूपये में होना चाहिए, उसे केवल 1500-2000 रुपये के वार्षिक किराए पर लीज पर ले लिया गया है। यह गरीब मुसलमानों के हितों पर कुठाराघात है। ऐसी जमीन कब्जा मुक्त होनी चाहिए और इसका उपयोग गरीब मुसलमानों को मजबूत करने, उनकी गरीबी दूर करने के लिए किया जाना चाहिए।
अब्दुल रहमान ने कहा कि वक्फ बिल आम मुसलमानों के हित में है। हर मुसलमान यह बात समझ रहा है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर मुट्ठी भर के कुछ लोगों के अलावा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को आम मुसलमानों का समर्थन नहीं मिल रहा है। यहां तक कि अजमेर शरीफ दरगाह के लोगों के साथ-साथ कई अन्य बड़े मुसलमान नेताओं ने भी इसका स्वागत किया है। यही कारण है कि इस मामले पर भी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को कोई बड़ा समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि विपक्ष में भी ज्यादातर नेता इसके विरोध में नहीं हैं।
'खत्म हो जाएगा सारा विरोध'
उन्होंने कहा कि इसी तरह सीएए और एनआरसी के नाम पर भी मुसलमानों को गुमराह किया गया था। उन्होंने कहा कि इसी पर्सनल लॉ बोर्ड ने लोगों को यह डर दिखाया था कि सीएए आ जाने से मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। जबकि इस कानून में कहीं नागरिकता छीने जाने का प्रावधान ही नहीं था। सीएए आने के बाद भी आज तक किसी मुसलमान की नागरिकता नहीं छिनी। इसी तरह तीन तलाक को भी मुसलमानों के विरोध में बताया गया था, लेकिन आज इसके कारण कई मुसलमानों के घर टूटने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह वक्फ संशोधन बिल का भी कोई दुरुपयोग नहीं होगा और इसका प्रावधान सामने आने पर हर मुसलमान इसका स्वागत करेगा।