नीति आयोग के सदस्य और भारत सरकार के रणनीतिकारों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार लॉकडाउन पर अंतिम राय बनाने में लगी है। अकेले मुंबई में संक्रमितों की संख्या सोमवार शाम तक 5,589 को पार कर चुकी है। दिल्ली में 3108 तो अहमदाबाद में 1298 संक्रमित हो चुके हैं।
देश के फेफड़ों यानी पल्मोनरी विभाग के जाने-माने चिकित्सक का मानना है कि लॉकडाउन से छूट बहुत कड़ी शर्त के साथ ही संभव है। उनकी राय में जहां भी कोविड-19 का स्तर काफी अधिक है, उस जिले की पूरी सीमा सील की जानी जानी चाहिए। जैसे मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर में लॉकडाउन का सख्ती से पालन होना चाहिए।
उड़ीसा ने लॉकडाउन को बढ़ाने की वकालत की। तब जबकि वहां कोविड-19 का संक्रमण करीब-करीब नियंत्रण में है। वहीं रिकवरी रेट, डेथ रेट, संक्रमितों की संख्या के लिहाज से केरल के नतीजे बहुत उत्साहजनक हैं। गोवा संक्रमण से मुक्त हो चुका है।
लेकिन देश में कोविड-19 की चिंतनीय तस्वीर महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश बना रहे हैं। गुजरात में संक्रमितों की संख्या 3550, महाराष्ट्र में 8600 को पार कर गई है। यहां भी संक्रमण उन्हीं क्षेत्रों में है जहां व्यवसायिक गतिविधियां काफी अधिक है।
व्यावसायिक गतिविधियों वाले इलाकों और उद्योगों की कई तरह की चुनौतियां हैं जो सुलझ नहीं रही हैं। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन और सीआईआई नार्थ इंडिया के अध्यक्ष दिनेश दुआ का भी कहना है कि एमएसएमई की दशा बेहद खराब है।
बिना राहत पैकेज के इस क्षेत्र का खड़ा हो पाना मुश्किल हैं। एमएसएमई इंटरप्राइजेज के अनिल भारद्वाज के अनुसार एमएसएमई के कई सेक्टर तो बिल्कुल बैठ चुके हैं। ट्रांसपोर्ट, पर्यटन, सर्विस सेक्टर का हाल काफी बुरा है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक निदेशक ने स्वीकार किया कि व्यवसायिक गतिविधियां ठप होने से न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ है, बल्कि राज्य सरकारों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और केंद्र सरकार के स्तर पर यह मामला अभी तक विचाराधीन है।