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चुनौती बड़ी है, क्या लंबे समय के लिए जम्मू-कश्मीर जा रहे हैं सुरक्षा बल?

Fri, 02 Aug 2019 09:33 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जम्मू-कश्मीर में कुछ बड़ा हो रहा है। क्या सीमा पार से किसी बड़े आतंकी हमले का अलर्ट है, अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है और घाटी में अब आतंकियों के खिलाफ सैन्य बलों का विशेष ऑपरेशन शुरू होने जा रहा है, लोगों के दिमाग में ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं। घाटी में अगर तमाम सुरक्षा बलों की बात करें तो अब इनकी संख्या एक लाख से ज्यादा हो गई है। जम्मू-कश्मीर में तैनाती के लिए जा रहे सुरक्षा बलों से कहा जा रहा है, 'चुनौती बड़ी है, आप लंबे समय के लिए जे एंड के जा रहे हैं। 

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रॉ व आईबी के सूत्रों की मानें तो अगले दो-तीन दिन में स्पेशल फोर्सेज के जवान भी घाटी में एयरलिफ्ट किए जाएंगे। इनके अलावा अर्धसैनिक बलों के शॉर्प शूटरों को भी तैयार रहने के लिए कहा गया है। शुक्रवार को सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने श्रीनगर में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह कहा कि घाटी में आईईडी विस्फोटकों का खतरा ज्यादा है। 

पाकिस्तानी आर्मी, आईएसआई और आतंकी समूह, ये तीनों मिलकर राज्य में शांति व्यवस्था को बिगाड़ने का प्लान तैयार कर रहे हैं। यह भी कहा गया है कि घाटी में आतंकी हमलों का इनपुट है। प्रेसवार्ता के फौरन बाद जेएंडके सरकार ने अमरनाथ यात्रियों और दूसरे पर्यटकों को कश्मीर से वापस लौटने की सलाह दे दी। इससे पहले यह जानकारी आई कि जम्मू-कश्मीर में वायुसेना को अलर्ट कर दिया गया है। 
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पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी। महबूबा मुफ्ती कई दिनों से 35ए का राग अलाप रही हैं। वे कह रही हैं कि केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा बलों की तैनाती का मकसद 35ए को खत्म करना है। उन्होंने इस एक्ट को बारूद की संज्ञा दे डाली और कहा, अगर सरकार ने इसे छेड़ने का प्रयास किया तो घाटी के लोग सड़कों पर उतर जाएंगे। 

तो फिर लंबे समय तक सुरक्षा बलों की तैनाती का क्या मतलब है

इंटेलीजेंस एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि सुरक्षा बलों की तैनाती लंबे समय के लिए है। हो सकता है कि इनकी वापसी जेएंडके विधानसभा चुनाव होने के बाद ही संभव हो। यह भी हो सकता है कि मौजूदा आतंकी अलर्ट की स्थिति से निपटने के बाद इन सुरक्षा बलों को निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए संवेदनशील बूथों पर तैनात कर दिया जाए। केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल और वहां के राजनीतिक दलों को भी इस पर कोई एतराज नहीं है कि अक्तूबर-नवंबर में हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड आदि राज्यों के साथ जेएंडके विधानसभा का चुनाव हो जाए।

दूसरा कारण, भाजपा अनुच्छेद 35ए को आगे बढ़ाने का मन बना चुकी है। हालांकि अभी इसे एक झटके में खत्म करना संभव नहीं है, इसलिए भाजपा धीरे-धीरे इसे लोगों के बीच ले जा रही है। अगर कोई राजनीतिक दल इसके विरोध में कुछ बड़ा करने का प्रयास करता है तो उस स्थिति पर समय रहते काबू पाया जा सकता है। तीसरा, राजनीतिक परिसीमन का मसला है। भाजपा का प्रयास है कि इसे जल्द से जल्द कराया जाए। इसके चलते विधानसभा में नई सीटें बन सकती हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की 111 सीटें हैं, लेकिन मौजूदा स्थितियों में केवल 87 सीटों पर चुनाव लड़ा जाता है।

वहां के संविधान के सेक्शन-47 के अनुसार, 24 सीटों पर चुनाव नहीं होता है। ये सीटें खाली रहती हैं। यहां बता दें कि जब जम्मू-कश्मीर का संविधान बना तो 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ी गई थीं। राज्य के भाजपा नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को परिसीमन बाबत जो रिपोर्ट दी है, उसमें इन्हीं 24 सीटों का जिक्र है। सुरक्षा बलों की तैनाती के दौरान परिसीमन की प्रक्रिया आसानी से संपन्न हो सकती है।

आतंकियों, उनके हमदर्दों को ढूंढ निकालने और बेनामी संपत्ति जब्त करना

सुरक्षा बलों की लंबे समय के लिए तैनाती का एक मतलब आतंकियों और उनके हमदर्द लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है। एनआईए, ईडी और आयकर, ये तीनों एजेंसियां जेएंडके में पहुंच चुकी हैं। बाकायदा एनआईए और ईडी ने तो कई जगहों पर छापेमारी भी की है। जांच एजेंसियों को सूचना मिली है कि घाटी में बड़े पैमाने पर अलगाववादी और दूसरे संगठन आतंकियों की मदद कर रहे हैं। 

एनआईए तो यह खुलासा भी कर चुकी है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग की मदद से आतंकियों को कश्मीर में बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा सुरक्षा बलों पर पत्थराव करने वाले स्थानीय गैंग भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। लिहाजा अब नया एंटी टेरर बिल पारित हो गया है, इसलिए एनआईए आतंकियों की मदद करने वालों को भी आतंकी करार देकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है।

जांच एजेंसियों के अधिकारी बताते हैं कि अगले सप्ताह से घाटी के चप्पे चप्पे पर तलाशी अभियान शुरू होगा। इसमें सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा मिलिट्री इंटेलीजेंस और रॉ की यह सूचना भी है कि मौजूदा समय में करीब 39 आतंकवादी घाटी में मौजूद हैं। प्लान यह है कि इस बार सैन्य बल किसी भी आतंकी को नहीं छोड़ेंगे।

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