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अमर उजाला पोल: क्या मोबाइल की 5जी टेक्नोलॉजी पर जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाह? पाठकों का ऐसा रहा जवाब

Sat, 05 Jun 2021 12:03 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में 5जी ट्रायल - फोटो : पिक्साबे
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क्या मोबाइल की 5जी टेक्नोलॉजी पर कुछ लोग जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं? अमर उजाला डॉट कॉम के इस पोल पर अधिकतर पाठकों ने जवाब हां में दिया। 59.55% पाठकों ने माना कि मोबाइल की 5जी टेक्नोलॉजी पर कुछ लोग जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं। वहीं 40.45% पाठकों का जवाब नहीं में रहा। 

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बता दें कि दूरसंचार विभाग ने 5जी टेक्नोलॉजी और स्पेक्ट्रम ट्रायल की अनुमति दे दी है। संचार मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि दूरसंचार सेवा प्रदाता भारत के विभिन्न स्थानों पर 5जी ट्रायल शुरू करेंगेमंत्रालय ने बताया कि दूरसंचार कंपनियां ये ट्रायल ग्रामीण, अर्ध शहरी और शहरी इलाकों में शुरू करेंगी।

5जी तकनीक और स्पेक्ट्रम का ट्रायल शुरू करने वाली कंपनियों में भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन आईडिया और एमटीएनएल शामिल हैं। इन कंपनियों ने मूल उपकरण निर्माताओं और तकनीक मुहैया कराने वाली कंपनियों (नोकिया, एरिक्सन, सैमसंग और सी डॉट) से हाथ मिलाया है।
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5जी मोबाइल टावरों पर अफवाह
देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हालात तो गंभीर बने ही हुए हैं, इस दौरान अफवाहों ने स्थिति और विकट कर दी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट किए गए हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर का कारण 5जी मोबाइल टावरों की टेस्टिंग है। अब, संचार मंत्रालय के तहत आने वाले दूरसंचार विभाग ने इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया है और कहा है कि ऐसे संदेश गलत हैं।


इस संबंध में जारी एक विज्ञप्ति में विभाग ने कहा है कि कोविड-19 के प्रसार और 5जी टेक्नोलॉजी के बीच कोई संबंध नहीं है। इसके साथ ही विभाग ने आग्रह किया कि इस बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारियों और अफवाहों पर ध्यान न दें। विभाग ने कहा कि इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि 5जी टेक्नोलॉजी का कोरोना महामारी से कोई संबंध है। ऊपर से अभी भारत में 5जी टेस्टिंग शुरू भी नहीं हुई है, ऐसे में ये बातें तथ्यहीन हैं कि भारत में कोरोना संक्रमण 5जी ट्रायल की वजह से फैल रहा है।
 
मोबाइल टावरों से नॉन-आयोनाइजिंग रेडियो फ्रीक्वेंसी निकलती हैं, ये बहुत कमजोर होती हैं और मनुष्यों समेत किसी भी जीवित कोशिका को नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं। बता दें कि दूरसंचार विभाग ने रेडियो फ्रीक्वेंसी फील्ड के लिए एक्सपोजर लिमिट के लिए मानक निर्धारित किए हैं, जो इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (आईसीएनआईआरपी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से तय की गई सुरक्षित सीमा से करीब 10 गुना अधिक कठोर हैं।

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