मौलाना सैयद अरशद मदनी (फाइल फोटो)
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के बीच शुक्रवार को संघ मुख्यालय केशव कुंज में महत्त्वपूर्ण मुलाकात हुई है। इस मुलाकात के बाद पहली बार बयान जारी कर जमीअत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि संघ को मुस्लिमों के प्रति अपना नजरिया बदलना चाहिए।
हालांकि, जमीअत ने कहा है कि व्यक्तिगत तौर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत अच्छे व्यक्ति हैं और वे हिंदू-मुस्लिम एकता बढ़ाना चाहते हैं। सोमवार को जमीअत के द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि मौलाना अरशद मदनी का स्पष्ट विचार है कि संघ को मुस्लिमों के प्रति अपना नजरिया बदलना चाहिए। उसे उनका विश्वास जीतने के लिए जमीनी स्तर पर काम भी करना चाहिए।
मदनी ने कहा है कि उन्होंने भागवत से हुई मुलाकात के दौरान यह बात रखी थी कि वे वीर सावरकर और सदाशिव गोलवलकर के विचारों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इस पर संघ प्रमुख की तरफ से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया आई और संघ प्रमुख ने कहा कि पीछे की बात छोड़कर वर्तमान को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि इसके बिना देश की तरक्की संभव नहीं है।
दोनों नेताओं की यह बात इस लिहाज से भी महत्त्वपूर्ण है कि कुछ ही दिनों में राममंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आ सकता है। ऐसे समय में सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए संघ जमीअत की भूमिका को समझ रहा है।
हालांकि, खबरें इस बात की भी हैं कि जमीअत बदले माहौल में संघ प्रमुख से मुलाकात की कोशिश में था, लेकिन संघ प्रमुख मामला टाल रहे थे। लेकिन भाजपा से संघ में रामलाल की वापसी के बाद दोनों नेताओं के बीच वार्ता की कोशिश सफल हो सकी।