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क्या इमरान खान मसूद अजहर के जरिए खुद की छवि उभारने का प्लान तैयार कर रहे हैं? 

Tue, 05 Mar 2019 03:37 AM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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इमरान खान - फोटो : Facebook
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आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं। भारत-पाक के बीच चले तीन-चार दिन के घटनाक्रम को आपस में जोड़ें तो कुछ समझ आता है। सवाल खड़ा होता है कि क्या इमरान खान मसूद अजहर के जरिए खुद की छवि उभारने का प्रयास तो नहीं कर रहे हैं। इसे यूं देखें, पहले अभिनंदन की बिना शर्त रिहाई, उसके बाद पाकिस्तान के एक मंत्री कहते हैं कि मसूद काफी बीमार है, वह घर से बाहर तक कदम नहीं रख सकता। उसके अगले दिन बयान आता है कि पाकिस्तान मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए तैयार हो सकता है। अगले ही दिन, रविवार को खबर उड़ती है कि मसूद मारा गया। 

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हालांकि पाकिस्तान ने इसका खंडन कर दिया। अगली कड़ी में पाकिस्तान के संस्कृति मंत्री फयाज-उल-हसन ने दावा कर दिया कि जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर जिंदा है। और हां, इन सबके बीच पाकिस्तान की संसद में इमरान खान को शांति के नोबेल से नवाजे जाने की खबर भी चल गई। बता दें कि पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले की जिम्मेदारी मसूद अजहर के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ही ली थी। वह इससे पहले भी भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका इै। भारत, संयुक्त राष्ट संघ में लंबे समय से उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने का प्रयास कर रहा इै, मगर हर बार चीन वीटो का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को गिरा देता है। इतना ही नहीं, भारत के समर्थन में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस भी यह प्रस्ताव पेश कर चुके हैं, लेकिन चीन हमेशा पाकिस्तान की सलाह मानते हुए उक्त प्रस्ताव पर वीटो ले लेता है। 

भारत-पाक सम्बन्धों के जानकार और इंडियन इन्स्टिटूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज से जुड़े सरल शर्मा भी इससे इंकार नहीं करते कि इमरान खान दुनिया के सामने खुद की ब्रांडिंग के लिए ये सब कर रहे हैं। इससे अच्छा कोई दूसरा मौखा उन्हें मिलता भी नहीं। ऐसा कर वह विश्व जनमत को भी यह संदेश देने में कामयाब हो जाएगा कि पाकिस्तान अब बदलाव की राह पर है। हालाँकि आतंकवाद की नीति से पाकिस्तान बिलकुल दूर हट जाएगा, इसकी सम्भावना अभी कम है। यह बात सही है, मौजूदा घटनाक्रम में इमरान खान ने एक तीर से कई निशाने लगा दिए हैं। 
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अभिनंदन की रिहाई के बाद वहाँ की संसद द्वारा इमरान खान को नोबेल देने का प्रस्ताव पास करना, उक्त बातों को बल प्रदान करता है। एक मंत्री कहते हैं, कि मसूद बीमारी के चलते बुरी अवस्था में है, दूसरे मंत्री बोलते हैं, ठीक है। तभी यह खबर भी निकलती है कि मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की राह में वह यानी पाकिस्तान बाधा नहीं बनेगा। इन सबके बीच यह भी कहा जा रहा है कि वाखई मसूद अजहर की हालत नाजुक है। हो सकता है कि वह ज्यादा दिन न पकड़े, इसके मद्देनजर यह सब प्लान तैयार किया गया हो। 

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) भी एक बड़ी वजह

सरल शर्मा का कहना है कि इमरान खान जो ये सब कर रहे हैं, उसके पीछे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का भी बड़ा दबाव है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को आतंक के वित्तपोषण पर रोक लगाने की चेतावनी दी है। वजह, पुलवामा हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान-आधारित जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। हमले की निंदा करते हुए, एफएटीएफ ने चिंता जताई थी कि पुलवामा आतंकी हमले जैसी घटनाओं ने साबित कर दिया कि दुनिया भर के समाजों को आतंकवाद की धमकी दी जाती रही है, और वह धन के बिना सम्भव नहीं हो सकता है। 

इस बीच, वित्तीय निगरानी इकाई ने पाकिस्तान में 2017 में जारी 5,548 एसटीआर की तुलना में 2018 में 8,707 संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) जारी किए हैं। 
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी और फरवरी में लगभग 1,136 एसटीआर जारी किए गए हैं। दुनिया भर में आतंकी फाइनैंसिंग को रोकने के लिए काम करने वाली संस्था फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में बरकरार रखा है। टास्क फोर्स के अनुसार, अक्टूबर, 2019 तक यदि पाकिस्तान उसकी 27 मांगों पर काम नहीं करता है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इस दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को फाइनैंस करने की जानकारी देनी चाहिए। 

क्या होती है एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट

 एफएटीएफ पैरिस स्थित एक अंतर-सरकारी संस्था है। इसका काम गैर-कानूनी आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है।  इसका गठन 1989 में किया गया था। एफएटीएफ द्वारा किसी देश को ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर उसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है। आतंकवादी संगठनों को फाइनैंसिंग के तरीकों पर लगाम न कसने वाले देशों या लोगों को इस लिस्ट में डाला जाता है।  

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