पाकिस्तान, जिस आतंकी पॉलिसी को लेकर चल रहा है, वैसा ही कुछ 'गुपकार' रोड पर भी देखने को मिल रहा है। पड़ोसी राष्ट्र चाहता है कि जम्मू-कश्मीर में हो रहे जिला विकास परिषद के चुनाव में बाधा पहुंचे। गुपकार गैंग भी इस मौके का फायदा उठाना चाहता है। ये कहना है सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) का।
सुरक्षा विश्लेषक, ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पाकिस्तान और गुपकार रोड वाले लोगों की मंशा है कि अनुच्छेद 370 का भरसक विरोध किया जाए। दोनों का मकसद है कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब उछाला जाए। ये लोग अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि आतंकियों को मदद पहुंचाने में केवल पाकिस्तान का हाथ ही नहीं है, बल्कि गुपकार गैंग के कुछ लोग भी कथित तौर पर उनकी मदद करते रहे हैं। वही खानदानी लोग जो जम्मू-कश्मीर की सत्ता को अपने हाथ में रखना चाहते हैं, आज गुपकार रोड पर बैठक कर रहे हैं। इनका मकसद है कि उनके बंगलों में कैद सत्ता की चाबी गांव तक न पहुंचे। नगरोटा एनकाउंटर पर गुपकार गैंग ने कुछ नहीं बोला। पावर आम आदमी के हाथ में आए, इससे वे क्यों डरते हैं।
जम्मू कश्मीर, विकास का एक नया मापदंड तय कर रहा है। वहां एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। इन सबके बीच पाकिस्तान, जिसकी स्टेट पॉलिसी का हिस्सा आतंकवाद भी है, वह इस राज्य में बाधा पहुंचाने का काम कर रहा है। उसका मकसद है कि आतंकियों को भेजकर बड़ा हमला करा दिया जाए। नगरोटा एनकाउंटर इसी का एक उदाहरण है।
इससे पहले भी दर्जनों आतंकी हमलों के सबूत पाकिस्तान को दिए जा चुके हैं। जांच एजेंसियों की चार्जशीट में दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास तक का नाम आतंकियों की मदद करने वालों में कथित तौर पर शामिल किया गया है। ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड), यहीं पर नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान बेनकाब हो चुका है। सारी दुनिया जानती है कि वह आतंकवाद का पालन पोषण कर रहा है।
पिछले दिनों पाकिस्तान स्थित मदरसे के मौलवी ने एक सूची जारी की थी। उसमें कहा गया है कि इस मदरसे से ग्रेजुएट करने वाले युवक टॉप आतंकी बन रहे हैं। उसका नाम भी यूनिवर्सिटी ऑफ टेरर रखा गया है। पाकिस्तान सरकार, उसे करोड़ों रुपये का फंड देती है। ये तो हमारी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट रहती हैं, इसलिए वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाता।