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Pakistan: क्या चीन ने पाक को सौंपा '3600' ड्रोन को कंट्रोल करने का राज, 'अबाबील' और 'पंजाब' की इनसाइड स्टोरी

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 20 May 2023 09:24 PM IST

सार

चूंकि पाकिस्तान ने अब ड्रोन के मामले में खासी महारत हासिल कर ली है, इसलिए अब भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों को भी खतरा पैदा हो गया है। जम्मू में वायुसेना के टेक्निकल एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला हो चुका है। उसके अगले दिन रतनूचक्क इलाके में सेना की ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर ड्रोन दिखाई पड़ा था।
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पाकिस्तान से ड्रोन की घुसपैठ। - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तान की तरफ से पंजाब में हथियार व ड्रग्स के पैकेट लेकर आने वाले 'ड्रोन' की संख्या में तेजी आ गई है। पहले एक-दो सप्ताह में दो तीन ड्रोन आते थे, मगर अब एक ही दिन में कई ड्रोन आने लगे हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान से लगते बॉर्डर के विभिन्न हिस्सों पर इस साल अभी तक सौ से अधिक ड्रोन देखने को मिले हैं। एक साथ '3600' ड्रोन को कंट्रोल करने का फार्मूला चीन के पास था, क्या अब वह राज पाकिस्तान के हाथ लग गया है, ये अहम सवाल खड़ा हो गया है। संभव है कि आने वाले दिनों में दस-पंद्रह किलोमीटर के क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से दर्जनों ड्रोन एक साथ भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास करें। पाकिस्तान ने चीन और तुर्की की मदद से मीरपुर जिले में झेलम नदी के निकट 'मंगला' डैम की घाटी को ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बना दिया है। पाकिस्तानी आयुद्ध कारखाने में तैयार 'अबाबील' ड्रोन को तैयार करने वाले इंजीनियरों की एक टीम को 'मंगला' डैम पर भेजा है। वहां पंजाब में भेजे जाने वाले ड्रोन का सर्विलांस सिस्टम तैयार किया गया है।

चीन व तुर्की से सस्ते ड्रोन लेकर किया बदलाव ...
केंद्रीय सुरक्षा बलों में ड्रोन इकाई पर काम कर रहे एक विशेषज्ञ के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी हरकत से बाज नहीं आएगा। अब तो उसे चीन और तुर्की से ड्रोन तकनीक मिल रही है। चीन व तुर्की से सस्ते ड्रोन लेकर पाकिस्तानी इंजीनियर उनकी तकनीक में छोटा-मोटा फेरबदल कर रहे हैं। यह बात साबित हो चुकी है। बीएसएफ ने गत दिसंबर में अमृतसर सेक्टर के अंतर्गत राजाताल सीमा चौकी के निकट पाकिस्तान से आए एक ड्रोन को मार गिराया था। उसकी फोरेंसिक जांच में पता चला कि वह ड्रोन चीन के एक प्रांत से उड़ा था और 28 दिन पाकिस्तान में रहने के बाद पंजाब की सीमा में पहुंचा है। ड्रोन के ब्लिंकर सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। दरअसल, वे यह देखते हैं कि ड्रोन किसी भी तरह से बीएसएफ की नजरों में न आए। शुक्रवार को अमृतसर में ही दो ड्रोन मार गिराए गए हैं। एक ड्रोन में साउंड सिस्टम मध्यम कर उस पर चमकने वाली स्ट्रिप लगा दी गई थी। यह इसलिए किया गया, ताकि डिलीवरी लेने वाले व्यक्ति को ड्रोन की लोकेशन आसानी से मालूम हो जाए। पाकिस्तान से लगती सभी राज्यों की सीमा को देखें तो गत वर्ष 300 से ज्यादा ड्रोन देखे गए। इनमें से करीब 70 फीसदी ड्रोन पंजाब में आए थे। 2021 में सौ से अधिक व 2020 में 77 ड्रोन देखे गए। इस वर्ष भी पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन का आंकड़ा सौ के पार जा चुका है। रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है, पाकिस्तान के ड्रोन हमले से सचेत रहना होगा। मंगला डैम के निकट आईएसआई ने बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। अभी पंजाब, जम्मू कश्मीर और राजस्थान में ही ड्रोन आ रहे हैं। पाकिस्तान ने जिस तरह के ड्रोन विकसित किए हैं, उनके जरिए सेना के वाहन और कैंपों को भी निशाना बनाया जा सकता है।  

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पाकिस्तान से ड्रोन की घुसपैठ। - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान की तरफ से पंजाब में हथियार व ड्रग्स के पैकेट लेकर आने वाले 'ड्रोन' की संख्या में तेजी आ गई है। पहले एक-दो सप्ताह में दो तीन ड्रोन आते थे, मगर अब एक ही दिन में कई ड्रोन आने लगे हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान से लगते बॉर्डर के विभिन्न हिस्सों पर इस साल अभी तक सौ से अधिक ड्रोन देखने को मिले हैं। एक साथ '3600' ड्रोन को कंट्रोल करने का फार्मूला चीन के पास था, क्या अब वह राज पाकिस्तान के हाथ लग गया है, ये अहम सवाल खड़ा हो गया है। संभव है कि आने वाले दिनों में दस-पंद्रह किलोमीटर के क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से दर्जनों ड्रोन एक साथ भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास करें। पाकिस्तान ने चीन और तुर्की की मदद से मीरपुर जिले में झेलम नदी के निकट 'मंगला' डैम की घाटी को ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बना दिया है। पाकिस्तानी आयुद्ध कारखाने में तैयार 'अबाबील' ड्रोन को तैयार करने वाले इंजीनियरों की एक टीम को 'मंगला' डैम पर भेजा है। वहां पंजाब में भेजे जाने वाले ड्रोन का सर्विलांस सिस्टम तैयार किया गया है।

चीन व तुर्की से सस्ते ड्रोन लेकर किया बदलाव ...
केंद्रीय सुरक्षा बलों में ड्रोन इकाई पर काम कर रहे एक विशेषज्ञ के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी हरकत से बाज नहीं आएगा। अब तो उसे चीन और तुर्की से ड्रोन तकनीक मिल रही है। चीन व तुर्की से सस्ते ड्रोन लेकर पाकिस्तानी इंजीनियर उनकी तकनीक में छोटा-मोटा फेरबदल कर रहे हैं। यह बात साबित हो चुकी है। बीएसएफ ने गत दिसंबर में अमृतसर सेक्टर के अंतर्गत राजाताल सीमा चौकी के निकट पाकिस्तान से आए एक ड्रोन को मार गिराया था। उसकी फोरेंसिक जांच में पता चला कि वह ड्रोन चीन के एक प्रांत से उड़ा था और 28 दिन पाकिस्तान में रहने के बाद पंजाब की सीमा में पहुंचा है। ड्रोन के ब्लिंकर सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। दरअसल, वे यह देखते हैं कि ड्रोन किसी भी तरह से बीएसएफ की नजरों में न आए। शुक्रवार को अमृतसर में ही दो ड्रोन मार गिराए गए हैं। एक ड्रोन में साउंड सिस्टम मध्यम कर उस पर चमकने वाली स्ट्रिप लगा दी गई थी। यह इसलिए किया गया, ताकि डिलीवरी लेने वाले व्यक्ति को ड्रोन की लोकेशन आसानी से मालूम हो जाए। पाकिस्तान से लगती सभी राज्यों की सीमा को देखें तो गत वर्ष 300 से ज्यादा ड्रोन देखे गए। इनमें से करीब 70 फीसदी ड्रोन पंजाब में आए थे। 2021 में सौ से अधिक व 2020 में 77 ड्रोन देखे गए। इस वर्ष भी पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन का आंकड़ा सौ के पार जा चुका है। रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है, पाकिस्तान के ड्रोन हमले से सचेत रहना होगा। मंगला डैम के निकट आईएसआई ने बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। अभी पंजाब, जम्मू कश्मीर और राजस्थान में ही ड्रोन आ रहे हैं। पाकिस्तान ने जिस तरह के ड्रोन विकसित किए हैं, उनके जरिए सेना के वाहन और कैंपों को भी निशाना बनाया जा सकता है।  

पाकिस्तान से ड्रोन की घुसपैठ। - फोटो : अमर उजाला
ड्रोन के निशाने पर हैं सैन्य प्रतिष्ठान ...
चूंकि पाकिस्तान ने अब ड्रोन के मामले में खासी महारत हासिल कर ली है, इसलिए अब भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों को भी खतरा पैदा हो गया है। जम्मू में वायुसेना के टेक्निकल एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला हो चुका है। उसके अगले दिन रतनूचक्क इलाके में सेना की ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर ड्रोन दिखाई पड़ता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मीरपुर जिले में झेलम नदी के निकट 'मंगला' डैम घाटी में ड्रोन ट्रेनिंग का एक पूरा नेटवर्क स्थापित किया है। वहां पाकिस्तानी सेना, आईएसआई व आतंकी संगठनों को ड्रोन हमले की ट्रेनिंग दी जाती है। पावर प्लांट, रिफाइनरी, न्यूक्लियर प्लांट, डैम और आयुध कारखाने भी ड्रोन हमले की जद में आ सकते हैं। मंगला डैम इलाके में क्वार्डकॉप्टर ड्रोन की ट्रेनिंग पर खास फोकस है। ये ड्रोन 4 से 6 पंखों वाला होता है। लगभग 18 से 20 किलोग्राम वजन ले जा सकता है। चीन ने वह तकनीक हासिल कर ली है कि 3600 ड्रोन एक साथ उड़ाकर उन पर कंट्रोल कैसे किया जाता है। अब पाकिस्तान के पास भी वह तकनीक पहुंच रही है। ऐसे में भारत को ड्रोन गिराने के लिए फायरिंग के अलावा दूसरी तकनीक को जल्द से जल्द विकसित करना होगा। अब एक साथ सैंकड़ों ड्रोन आए तो फायरिंग के जरिए उन पर नियंत्रण करना बेहद मुश्किल होगा।

'अबाबील' से शाहपर-2 तक का सफर ...    
गत वर्ष नवंबर में कराची में लगी हथियारों प्रदर्शनी में पाकिस्तान ने अपने दो ड्रोन प्रमुख तौर से प्रदर्शित किए थे। 'अबाबील' पहला ड्रोन था, जिसे पाकिस्तान की आर्डिनेंस फैक्ट्री ने तैयार किया था। इसके बाद शाहपर-2 की बारी आई। ये दोनों घातक ड्रोन हैं। इनके जरिए सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया जा सकता है। दोनों ही ड्रोन, पाकिस्तानी सेना, नौसेना और वायुसेना में शामिल हो चुके हैं। अबाबील 5 ड्रोन पांच किलो तक वजन उठा सकता है। इसमें 16 एमएम और 18 एमएम का मोर्टार लगाया जा सकता है। 120 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने वाला अबाबील वी-5 हाई-स्पीड ड्रोन आ चुका है। अबाबील-10 ड्रोन, दस किलोग्राम वजन के हथियार ले जाने में सक्षम है। यह 3000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है। जिस तरह से पाकिस्तान, ड्रोन के मामले में आत्मनिर्भर बन रहा है, वैसे ही भारतीय रक्षा प्रणाली के लिए जोखिम बढ़ जाता है। आर्मी, एयरफोर्स, बीएसएफ और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के पास अभी ऐसे तकनीकी उपकरणों का अभाव है,  जिनकी मदद से ड्रोन को समय रहते गिराया जा सकता है। क्वार्ड कॉप्टर जैसे छोटे साइज वाले ड्रोन मौजूदा रडार प्रणाली की पहुंच से दूर हैं। छोटे ड्रोन का झुंड हो तो भी पता नहीं लगता, बड़ा ड्रोन ही रडार की जद में आ सकता है।
 

भारत-पाकिस्तान सीमा। - फोटो : फाइल फोटो
पक्षी जैसे दिखने वाले ड्रोन का झुंड तैयार किया ...
ड्रोन तकनीक में चीन काफी आगे निकल चुका है। उसने पक्षी के आकार के ड्रोन तैयार कर दिए हैं। रडार क्रॉस सेक्शन की मदद से पक्षी आकार के ड्रोन का पता लगाना मुश्किल होता है। मौजूदा रडार सिस्टम यह तय नहीं कर पाता कि वह पक्षी है या ड्रोन है। ड्रोन गन के जरिए एक किलोमीटर तक के दायरे में ड्रोन के रेडियो सिग्नल को जाम किया जा सकता है। ड्रोन कैचर के द्वारा उड़ते हुए ड्रोन पर जाल फेंका जाता है। स्काईवॉल में नीचे से ड्रोन शूट किया जाता है। यह भी एक तरह का जाल होता है। स्काई ड्रोन सिस्टम में पांच सौ से एक हजार मीटर की दूरी तक ड्रोन की फ्रीक्वेंसी कम कर दी जाती है। इस तकनीक की मदद से ड्रोन गिर जाता है। भारत में परंपरागत एयर डिफेंस सिस्टम में इस्राइली स्पाइडर और रूस में निर्मित ओएसए-ओके से केवल छोटे ड्रोन का पता चल सकता है। हालांकि इनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है। नेवी के लिए स्मैश 2000 प्लस एंटी ड्रोन सिस्टम खरीदा गया है। आर्मी व दूसरे केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी ऐसा सिस्टम मुहैया कराने की बात कही जा रही है। पाकिस्तान के पास बायरकटार टीबी-2 ड्रोन, चीन निर्मित डीजेआई मैट्रिस-300, सीएच-4 यूसीएवी, अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (यूसीएवी) भी हैं, इसके मद्देनजर भारत को अपना एंटी ड्रोन सिस्टम तैयार करना होगा।
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